
Noida News : नोएडा के सेक्टर-90 स्थित अल्फाथंब परियोजना में बिल्डर द्वारा नियमों की अनदेखी और खरीदारों के साथ धोखाधड़ी का मामला सामने आया है. आरोप है कि जिस इमारत के लिए नोएडा प्राधिकरण ने 26 मंजिलों की मंजूरी दी थी, वहां 29 मंजिला इमारत खड़ी कर दी गई. आवंटियों का कहना है कि उन्हें नक्शे में दिखाए गए फ्लोर से अलग फ्लोर पर कब्जा दिया जा रहा है, जिससे वे ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.
वर्ष 2014 में नोएडा प्राधिकरण ने सीबीएस इंटरनेशनल प्रोजेक्ट लिमिटेड को आइटी-आइटीईएस श्रेणी के तहत भूखंड संख्या-1 का आवंटन किया था। उस समय 23 मंजिला इमारत की मंजूरी दी गई थी, जिसे बाद में संशोधित कर 26 मंजिला तक बढ़ाया गया। लेकिन निर्माण कार्य में अनियमितता बरतते हुए बिल्डर ने 29 मंजिला इमारत बना दी। यह मंजूरी केवल भूतल से 26वें फ्लोर तक ही सीमित थी.
खरीदारों ने आरोप लगाया है कि उन्हें नक्शे में अपर ग्राउंड फ्लोर को ग्राउंड फ्लोर बताकर गुमराह किया गया. सुम्बुल सिद्दिकी नामक खरीदार ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2014 में प्रॉपर्टी बुक की थी, लेकिन कब्जा देने के समय उन्हें पहली मंजिल पर अपर ग्राउंड फ्लोर का बोर्ड लगाकर प्रॉपर्टी दी जा रही है. वह बिना रजिस्ट्री और स्टांप ड्यूटी के कब्जा लेने को तैयार नहीं हैं. इस मामले में नोएडा प्राधिकरण को कई शिकायतें दी गईं, जिसके बाद प्राधिकरण ने नक्शे से संबंधित दस्तावेजों की मांग करते हुए कई नोटिस जारी किए। बावजूद इसके, प्राधिकरण ने परियोजना को ओसी (Occupancy Certificate) और सीसी (Completion Certificate) जारी कर रजिस्ट्री की अनुमति दे दी.
बिल्डर के खिलाफ थाना सेक्टर-142 में धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है. कई लोगों ने आरोप लगाया है कि उनसे पैसा लेकर भी प्रॉपर्टी नहीं दी गई. वहीं, सीबीएस इंटरनेशनल प्रोजेक्ट लिमिटेड के निदेशक ईशान रस्तोगी का कहना है कि रेरा पोर्टल पर परियोजना से संबंधित सभी जानकारी अपलोड की गई है और बुकिंग के अनुसार ही प्रॉपर्टी दी जा रही है.