सेक्टर-82 कट के पास सिर और हाथ कटी महिला का शव मिलने के मामले में पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। आरोपी मोनू सिंह ने अपनी प्रेमिका प्रीति की हत्या कर दी और शव को बस में ठिकाने लगाया। पुलिस ने इस मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए 192 घंटे तक ऑपरेशन-82 चलाया।
पहचान से शुरू हुई जांच
शव मिलने के बाद पुलिस उसकी पहचान में उलझी रही। आखिरकार सेक्टर-49 थाने से मिली मुखबिर की सूचना और महिला के बच्चों द्वारा पैर में पहने बिछुए से पहचान करने पर मामला आगे बढ़ा। बच्चों ने बताया कि उनकी मां प्रीति बृहस्पतिवार से लापता थी। पड़ोसियों ने पुलिस को बताया कि प्रीति का मोनू सिंह से नजदीकी संबंध था। इसी कड़ी से पुलिस आरोपी तक पहुंची।
सीसीटीवी फुटेज से मिला सुराग
बरौला गांव के सीसीटीवी फुटेज में प्रीति के बुधवार शाम के बाद घर न लौटने की जानकारी मिली। पुलिस ने उस बस की तलाश की जिसे मोनू चलाता था। फुटेज में बस सेक्टर-100, 104, 98 और शव मिलने वाली सड़क से गुजरती दिखी। यही बस जांच का अहम सुराग बनी।
आरोपी का कबूलनामा
पकड़े जाने पर मोनू ने पहले टालमटोल की लेकिन बाद में पूछताछ में टूट गया और जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि सेक्टर-105 में बस रोककर उसने प्रीति को मैगी खिलाने की कोशिश की थी। इसी दौरान झगड़ा हुआ। प्रीति ने मोनू पर पत्नी और बच्चों को छोड़कर उसके साथ रहने का दबाव बनाया और धमकी दी कि वह उसकी बेटियों का चाल-चलन बिगाड़ देगी। इससे परेशान होकर मोनू ने पहले से चोरी कर रखे गड़ासे से हत्या कर दी।
बस में ही काटा गया शव
डीसीपी ने बताया कि हत्या एसी बस में हुई थी, जिसके सभी शीशे बंद थे। इस कारण महिला की चीख बाहर नहीं सुनाई दी। हत्या के बाद मोनू ने शव के टुकड़े कर दो जगह फेंक दिए। गाजियाबाद से लौटकर वह प्रीति के बच्चों को अपने घर ले गया और उन्हें पुलिस से झूठ बोलने के लिए कहा कि उनकी मां कहीं गई हुई हैं।
फॉरेंसिक जांच से खुला राज
हत्या के बाद मोनू ने बस को चार बार धुला, लेकिन फॉरेंसिक टीम ने बस की जांच में मानव रक्त के अंश बरामद किए। यही सबूत आरोपी के खिलाफ निर्णायक साबित हुए।
पुलिस का ऑपरेशन-82
इस मामले की जांच के लिए पुलिस ने विशेष टीम बनाई थी। एसीपी प्रवीण सिंह ने ऑपरेशन-82 नाम से व्हॉट्सएप ग्रुप बनाया था, जिसमें डीसीपी और एडीसीपी लगातार निर्देश दे रहे थे। टीम में तीन एसीपी, 59 सब-इंस्पेक्टर और 50 पुलिसकर्मी शामिल थे। जांच के दौरान 144 वाहनों की पड़ताल की गई, जिनमें से बस ही संदिग्ध निकली।