माँ को बाजार में छोड़कर घर लौटा और अपने ही साथ रह रहे दो नन्हे बच्चों – एक 3 साल का, दूसरा सिर्फ 4 साल का – को गोद में उठाया। फिर सीधे सेक्टर-137 की पारस टेयरा सोसाइटी के सामने वाले 10 फुट गहरे नाले तक ले गया और एक-एक करके दोनों को मौत के मुँह में धकेल दिया।
ये कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि नोएडा के सेक्टर-142 क्षेत्र में बीती रात हुई दिल दहला देने वाली सच्ची घटना है। इन मासूमों का गुनाह सिर्फ इतना था कि ये अपनी माँ के पहले पति से थे और इनका सौतेला पिता आशीष (22) इनसे नफरत करता था।पुलिस के अनुसार, आशीष और बच्चों की माँ नीलम दोनों मूल रूप से कानपुर के एक ही गाँव के हैं। नीलम की शादी आशीष के चचेरे भाई से हुई थी। उसी दौरान आशीष और नीलम के बीच नाजायज संबंध हो गए। जब बात खुली तो आशीष नीलम और उसके दोनों बच्चों को लेकर नोएडा भाग आया। यहाँ शहदरा गांव में आकर उसने नीलम से विवाह कर लिया, लेकिन बच्चों को कभी अपना नहीं सके। लोग बताते हैं कि आशीष अक्सर कहता था – “ये मेरे बच्चे नहीं हैं, मैं इन्हें अपने पास नहीं रख सकता।”
2 दिसंबर की शाम उसने आखिरी बार यह साबित कर दिया। नीलम को बाजार ले जाकर एक दुकान के बाहर बैठाया और कहा, “मैं बच्चों को लेकर आता हूँ।” फिर घर पहुँचा, दोनों बच्चों को बहला-फुसलाकर बाहर निकाला और नाले में फेंककर फरार हो गया।खुशी की बात ये रही कि कुछ राहगीरों ने बच्चों की चीखें सुनीं। पास-पड़ोस के लोगों ने किसी तरह दोनों मासूमों को नाले से बाहर निकाला। दोनों बच्चे अब पूरी तरह स्वस्थ हैं और चाइल्ड वेलफेयर कमिटी (CWC) की निगरानी में हैं।
गुरुवार सुबह सेक्टर-142 मेट्रो स्टेशन के पास से पुलिस ने आशीष को धर दबोचा। उसके खिलाफ हत्या के प्रयास की धारा 109(1)/93 BNS के तहत मुकदमा दर्ज है।एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “जब हमने इसे पकड़ा तो उसने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। बस इतना कहा – ‘मैं इन बच्चों को नहीं पाल सकता था।’”आज दो नन्ही जानें जिंदा हैं, लेकिन सवाल ये है – क्या सिर्फ कानून की सजा ही काफी है ऐसी हैवानियत के लिए? और वो माँ, जिसने अपने बच्चों को बचाने के लिए सब कुछ छोड़ दिया, अब आगे क्या करेगी? बच्चों के चेहरे पर अभी भी डर है। जब उनसे पूछा गया कि घर जाना चाहते हो तो दोनों चुप हो गए। शायद उन्हें अब भी समझ नहीं आया कि जिसे वे “पापा” कहते थे, उसने उन्हें मौत के लिए क्यों चुना।