नोएडा की साइबर क्राइम पुलिस ने दो युवकों को गिरफ्तार किया है, जो ठगों को अपने बैंक खाते देकर करोड़ों की ठगी में मदद कर रहे थे।गिरफ्तार आरोपियों में रिषभ तिवारी (21 वर्ष), पुत्र राकेश तिवारी, निवासी अमेठी कुवंर शुक्ला (20 वर्ष), पुत्र रामगोपाल शुक्ला, निवासी अमेठी हैं। प्रभारी डीसीपी साइबर क्राइम शैव्या गोयल ने बताया कि ये दोनों गुरुवार को सेक्टर-63 इलाके से पकड़े गए। उनके पास से ठगी में इस्तेमाल दो मोबाइल फोन भी बरामद हुए हैं।
ठगी का तरीका
ठग खुद को TRAI (टेलीकॉम अधिकारी) बताकर फोन करते थे। वे कहते थे कि आपके फोन से अश्लील वीडियो भेजा जा रहा है। फिर मुंबई क्राइम ब्रांच या CBI जांच के नाम पर डराते थे और "डिजिटल अरेस्ट" करके पैसे मांगते थे।एक पीड़ित ने 13 मार्च को शिकायत की, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की।
पकड़े गए सबूत
पुलिस को इनके बैंक खातों में ठगी से 10.95 लाख रुपये जमा मिले। इन खातों से जुड़े दूसरे राज्यों में 6 शिकायतें दर्ज हैं (उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली, बिहार, जम्मू-कश्मीर)। कुल इन खातों से 4 करोड़ 17 लाख रुपये की ठगी हुई है।
कानूनी कार्रवाई
इनके खिलाफ साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है, जिसमे भारतीय न्याय संहिता (BNS) की 308(2), 318(4), 319(2) और आईटी एक्ट की धारा 66D लगी हैं।
पुलिस का संदेश
प्रभारी डीसीपी साइबर क्राइम शैव्या गोयल ने कहा कि "डिजिटल अरेस्ट" जैसी कोई असली प्रक्रिया नहीं होती। कोई भी पुलिस, CBI, ED या इनकम टैक्स अधिकारी फोन पर अरेस्ट नहीं कर सकता। अगर कोई ऐसा कॉल आए तो घबराएं नहीं। तुरंत: हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करें। निकटतम पुलिस स्टेशन या साइबर थाने में बताएं।