Noida News : यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) के सीनियर मैनेजर बृजपाल सिंह के साथ साइबर ठगों ने करीब 1 करोड़ 25 लाख रुपये की बड़ी ठगी को अंजाम दिया है। मामला व्हाट्सएप पर एक कथित महिला 'दिव्या शर्मा' से हुई 'दोस्ती' से शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे निवेश के लालच में बदल गया। पीड़ित ने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई है, और पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
कैसे फंसा शिकार? दोस्ती से ठगी तक का सिलसिला
जानकारी के अनुसार, बृजपाल सिंह को कुछ महीने पहले व्हाट्सएप पर एक महिला ने दोस्ती का प्रस्ताव दिया, जो खुद को 'दिव्या शर्मा' बताकर बातचीत शुरू की। शुरुआती चैट में सामान्य बातें हुईं, लेकिन जल्द ही बातचीत का मोड़ निवेश की ओर मुड़ गया। दिव्या ने बताया कि वह 'गोल्डन ब्रिज इन्वेस्टमेंट' नामक एक कथित ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर काम करती है, जहां छोटी रकम निवेश करने पर 48 घंटे में दोगुना मुनाफा मिलता है। पीड़ित को विश्वास दिलाने के लिए दिव्या ने पहले छोटी राशि (कुछ हजार रुपये) निवेश कराने का सुझाव दिया। प्लेटफॉर्म पर दिखाए गए 'प्रॉफिट' के स्क्रीनशॉट्स ने बृजपाल का भरोसा जीत लिया.
इसके बाद ठगों ने स्टॉक ट्रेडिंग और हाई-रिटर्न इन्वेस्टमेंट के नाम पर धीरे-धीरे बड़ी रकम मंगवानी शुरू कर दी। कुल मिलाकर, अलग-अलग खातों में 1.25 करोड़ रुपये ट्रांसफर कराए गए। जब बृजपाल ने रकम निकालने की कोशिश की, तो प्लेटफॉर्म ने 'प्रोसेसिंग फीस' और 'टैक्स' के नाम पर और पैसे मांगे। अंत में, जब किसी तरह का रिटर्न नहीं मिला, तो दिव्या और उसके 'टीम' ने संपर्क तोड़ लिया। पीड़ित ने कस्टमर केयर को कॉल किया, लेकिन बार-बार 'इंतजार कीजिए' का जवाब मिला। जांच में पता चला कि 'गोल्डन ब्रिज इन्वेस्टमेंट' जैसी कोई कंपनी अस्तित्व में ही नहीं है.
यमुना अथॉरिटी में हड़कंप, साइबर सेल ने शुरू की जांच
बृजपाल सिंह यमुना अथॉरिटी में सीनियर मैनेजर के पद पर तैनात हैं और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में रहते हैं। इस घटना से अथॉरिटी में हड़कंप मच गया है। साइबर सेल ने बताया कि शिकायत मिलते ही केस दर्ज कर लिया गया है। IP ट्रेसिंग, बैंक ट्रांजेक्शन डिटेल्स और व्हाट्सएप चैट एनालिसिस से ठगों के नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह गैंग दिल्ली-एनसीआर और अन्य राज्यों में सक्रिय है, जो फर्जी ऐप्स और वेबसाइट्स के जरिए ठगी करता है। पुलिस ने पीड़ित के खातों से कुछ रकम फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन ज्यादातर पैसे लेयरिंग (कई खातों में घुमाने) के जरिए उड़ा दिए गए लगते हैं। डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने कहा, "ऐसे मामलों में तुरंत शिकायत करने से रिकवरी की संभावना बढ़ जाती है। हम अंतर-राज्यीय टीमों के साथ मिलकर गैंग का पर्दाफाश करेंगे।"