नेपाल में भारतीय सेना के गोरखा रेजिमेंट से जुड़ी भर्ती का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। रिपोर्टों के मुताबिक, नेपाल के पोखरा में पूर्व गोरखा सैनिकों और उनके समर्थकों ने भारतीय सेना में नेपाली युवाओं की भर्ती दोबारा शुरू करने की मांग उठाई है। उनकी प्राथमिकता विदेशों, खासकर खाड़ी देशों में नौकरी करने के बजाय भारतीय सेना में अग्निवीर के रूप में सेवा करने की है। भारत और नेपाल के बीच गोरखा भर्ती की पुरानी परंपरा रही है, लेकिन अग्निपथ योजना लागू होने के बाद यह प्रक्रिया लंबे समय से रुकी हुई है।
अग्निपथ योजना के बाद क्यों रुकी गोरखा भर्ती?
भारतीय सेना में नेपाली गोरखाओं की भर्ती का इतिहास करीब दो सदियों पुराना है। अग्निपथ योजना लागू होने के बाद नेपाल ने नई व्यवस्था के तहत अपने नागरिकों की भर्ती पर सहमति नहीं दी और 2022 से यह प्रक्रिया ठप है। इससे नेपाल के उन युवाओं के सामने विकल्प सीमित हुए हैं, जो पारंपरिक रूप से भारतीय सेना में जाना चाहते थे। जून 2026 में नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भी संकेत दिया था कि अगर भारत पहल करता है तो भर्ती के मुद्दे पर बातचीत दोबारा शुरू की जा सकती है।
पूर्व सैनिक बोले- भारतीय सेना में सेवा पहली पसंद
नेपाल में गोरखा युवाओं को सैन्य भर्ती की तैयारी कराने वाले प्रशिक्षण केंद्रों में आज भी बड़ी संख्या में युवा अभ्यास करते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कई युवाओं का कहना है कि वे भारतीय सेना में अपने परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाना चाहते हैं। भर्ती बंद होने के कारण कुछ युवा ब्रिटिश सेना, सिंगापुर पुलिस और दूसरे देशों की सेनाओं की ओर रुख कर रहे हैं, जबकि कई विदेशों में रोजगार तलाशने के लिए मजबूर हैं। पूर्व गोरखा सैनिकों का तर्क है कि भारतीय सेना में सेवा उनके लिए केवल नौकरी नहीं बल्कि सम्मान और पारिवारिक विरासत से जुड़ा विषय है।
गल्फ की नौकरियों की जगह सेना का सपना
नेपाल बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार के लिए खाड़ी देशों में भेजता है। हालांकि पश्चिम एशिया में हालिया तनाव और बदलते श्रम बाजार के कारण विदेशी रोजगार के अवसरों पर भी असर पड़ा है। ऐसे माहौल में भारतीय सेना में भर्ती का विकल्प नेपाली युवाओं के लिए आकर्षक माना जा रहा है। नेपाल में लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि भारत और नेपाल इस मुद्दे पर बातचीत कर पुराने भर्ती तंत्र को नए नियमों के अनुरूप आगे बढ़ाने का रास्ता निकालें।
अग्निवीर व्यवस्था पर भी है असमंजस
अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों की सेवा अवधि चार वर्ष निर्धारित है और इसके बाद चयनित 25 प्रतिशत तक युवाओं को नियमित सैन्य सेवा में बनाए जाने का प्रावधान है। बाकी युवाओं को कौशल और अन्य रोजगार अवसरों के साथ सेवा से बाहर आना होता है। केंद्र सरकार ने अग्निवीरों के लिए विभिन्न सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के रोजगार अवसरों को बढ़ाने के कदम भी उठाए हैं। ऐसे में नेपाली गोरखाओं की मांग सिर्फ भर्ती बहाल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अग्निपथ व्यवस्था के तहत उनके लिए भविष्य की संभावनाओं को लेकर भी सवाल जुड़े हैं।
पुराने सैन्य संबंधों को फिर चर्चा
नेपाल के पूर्व गोरखा सैनिकों की यह मांग भारत-नेपाल के पुराने सैन्य संबंधों को फिर चर्चा में ले आई है। अब नजर इस बात पर है कि दोनों देश गोरखा भर्ती को लेकर आगे किस तरह की पहल करते हैं। नेपाली युवाओं के लिए भारतीय सेना में शामिल होना जहां रोजगार और सम्मान से जुड़ा अवसर है, वहीं भारत के लिए गोरखा रेजिमेंट की ऐतिहासिक परंपरा और सैन्य संबंधों का भी महत्वपूर्ण पहलू है। ऐसे में आने वाले समय में इस मुद्दे पर बातचीत आगे बढ़ती है या नहीं, यह दोनों देशों के लिए अहम रहेगा।