
एक समय ऐसा भी था जब दालमंडी को बनारस की अदा, अदब और संगीत की राजधानी कहा जाता था. यहां के कोठों में शाम ढलते ही सुरों और घुंघरुओं की गूंज उठने लगा करती थी. इसके साथ ही यह इलाका अपनी नजाकत, नफासत और तहजीब के लिए पूरे देश में मशहूर हुआ करता था. आइए जान लेते हैं कि आखिर क्या है इस इलाके का इतिहास?
प्रसिद्ध तवायफों की नगरी
दालमंडी की शोहरत जद्दन बाई, रसूलन बाई और राजेश्वरी बाई जैसी प्रसिद्ध तवायफों से जुड़ी रही है. ये कलाकार अपने गानों, ठुमरी और नृत्य से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया करती थीं. जिससे देशभर से लोग सिर्फ इन्हें देखने और उनकी महफिलों का हिस्सा बनने बनारस आया करते थे.
सिर्फ कलाकार नहीं, आजादी की लड़ाई की सहयोगी भी
वहीं दालमंडी की तवायफें केवल कलाकार ही नहीं हुआ करती थीं बल्कि आजादी की लड़ाई में सहयोगी भी रहती थीं. इसमें जद्दन बाई जैसे नामों ने अपने कोठों पर स्वतंत्रता सेनानियों को शरण दी और आर्थिक मदद भी पहुंचाई है. उनके कोठे गुप्त बैठकों और रणनीतियों का अड्डा हुआ करते थे.
अंग्रेजों के उत्पीड़न का भी किया सामना
जब अंग्रेजों को तवायफों की सहायता करने का पता चला तो उन्होंने यहां पर छापेमारी और उत्पीड़न करना शुरू कर दिया. इस दौरान राजेश्वरी बाई जैसी कलाकारों को प्रताड़ित किया गया, मगर उन्होंने हार नहीं मानी. उनके गीत ‘भारत कभी न बन सकेला गुलाम’ से देशभक्ति की ज्वाला जल उठा करती थी.
दालमंडी ने तवायफ संस्कृति से लिया व्यापारिक रूप
वक्त के साथ दालमंडी ने तवायफ संस्कृति से आगे बढ़कर व्यापारिक रूप अख्तियार कर लिया. जिसके बाद यह पूर्वांचल का सबसे बड़ा सस्ता बाजार बन गया, जहां हर तरह का सामान मिल जाया करता था. पुराने कोठों की जगह अब दुकानों ने ले ली थी, लेकिन उस संगीत की गूंज अब इतिहास बन कर रह गई.
दालमंडी का इतिहास लगभग 300 साल पुराना
बता दें कि दालमंडी का इतिहास लगभग 300 साल पुराना रहा है. गोविंदपुरा कलां क्षेत्र में बसी यह जगह धीरे-धीरे एक मोहल्ले के रूप में विकसित हो गई. यहां पर तहज़ीब, तवायफ संस्कृति और व्यापार तीनों का अनूठा मेल दिखाई देता था, जिसने बनारसी संस्कृति को नई पहचान दिला दी.
दालमंडी को चौड़ा करने की तैयारी
वहीं अब विकास योजनाओं के तहत दालमंडी को चौड़ा करने की तैयारी जोरों-शोरों से चल रही है. इसके तहत लगभग 184 घर, 10,000 दुकानें और कई मस्जिदें इस योजना की जद में आ रही हैं. वहीं 17 मीटर चौड़ी सड़क बनाने के लिए प्रशासन मुआवजे पर बातचीत कर रहा है.