उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रोजेक्ट प्रवीण स्कूली छात्रों को व्यावसायिक शिक्षा देने का बड़ा दावा करती है, लेकिन हकीकत कुछ और है। सरकारी माध्यमिक स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों के लिए चल रही इस योजना में ट्रेनिंग प्रदाता कंपनियों की लापरवाही ने पूरे कार्यक्रम को प्रभावित कर दिया है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ( यूपीएसडीएम ) ने हाल ही में 47 ट्रेनिंग प्रदाता कंपनियों को नोटिस जारी किया है। इन कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने लक्ष्य बढ़ा-चढ़ाकर लिया, लेकिन छात्रों का पंजीकरण और प्रशिक्षण देने में देरी बरत रही हैं।
मिशन निदेशक की सख्त नोटिस
मिशन निदेशक पुलकित खरे ने सख्त नोटिस में लिखा है कि पिछले दो महीनों से कई स्कूलों में प्रशिक्षण लटका हुआ है। सात दिन के अंदर जवाब न देने पर इन कंपनियों को काली सूची में डाल दिया जाएगा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, योजना के तहत 62 हजार से ज्यादा छात्रों को कौशल प्रशिक्षण दिया जाना है। लेकिन अभी तक केवल 32 हजार छात्रों का ही पंजीकरण हो पाया है।
जिलों में स्थित और दयनीय
कई जिलों में स्थिति और खराब है। लखनऊ में 6, ललितपुर में 5, प्रतापगढ़ में 4 कंपनियों समेत कुल 47 कंपनियों को नोटिस मिला है। अन्य जिलों में भी एक-दो कंपनियां शामिल हैं।
लापरवाही पर विभाग सख्त: कपिल देव
व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा किपहले योजना की सफलता पर जोर दिया था, लेकिन इस लापरवाही पर अब विभाग सख्ती बरत रहा है। ऐसी देरी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (नेप 2020) के लक्ष्यों को भी प्रभावित कर रही है।
छात्रों का हो रहा समय बर्बाद
विभाग के लोगों का कहना है कि स्कूल स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा का यह प्रोजेक्ट छात्रों को रोजगार के लिए तैयार करने वाला था, लेकिन ट्रेनिंग पार्टनर्स की अनियमितता से छात्रों का समय बर्बाद हो रहा है। कई स्कूलों में उपकरणों की कमी और प्रशिक्षकों की अनुपस्थिति की भी शिकायतें आई हैं। यूपीएसडीएम ने चेतावनी दी है कि योजना को समय पर पूरा न करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। छात्रों और अभिभावकों को उम्मीद है कि सरकार जल्द इस समस्या का समाधान निकालेगी, ताकि प्रोजेक्ट प्रवीण सच्चे अर्थों में युवाओं का भविष्य संवार सके।