दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज है। इसी प्रक्रिया के तहत आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तथा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। जिन मतदाताओं के विवरण में तार्किक विसंगति या पुराने रिकॉर्ड से मिलान नहीं होने की स्थिति सामने आई है, उन्हें नोटिस देकर आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण देने का अवसर दिया जा रहा है।
लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी का क्या है मतलब?
SIR के दौरान चुनावी रिकॉर्ड में अलग-अलग तरह की विसंगतियों की पहचान की गई है। इनमें नाम की वर्तनी में अंतर, माता-पिता से जुड़े विवरण में असंगति, उम्र से संबंधित असामान्य अंतर या पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जानकारी का मिलान नहीं होना जैसी स्थितियां शामिल हो सकती हैं। अधिकारियों के मुताबिक, किसी व्यक्ति का रिकॉर्ड इस श्रेणी में चिन्हित होना अपने-आप यह साबित नहीं करता कि उसका नाम गलत है या वह मतदान के लिए अयोग्य है।
केजरीवाल के नाम पर भी उठे सवाल
अरविंद केजरीवाल को नोटिस दिए जाने की खबर ऐसे समय सामने आई है, जब दिल्ली में SIR के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड की दोबारा जांच चल रही है। हालांकि, केवल नोटिस जारी होने के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि केजरीवाल का नाम मतदाता सूची से निश्चित रूप से हटा दिया जाएगा। चुनावी प्रक्रिया में संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने का मौका दिया जाता है। अंतिम निर्णय जांच और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर होता है।
33 लाख से ज्यादा मतदाता जांच के दायरे में
दिल्ली की प्रारंभिक मतदाता सूची में करीब 33.13 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड को नोटिस के लिए चिन्हित किया गया है। इनमें लगभग 13.80 लाख रिकॉर्ड ‘नो मैपिंग’ और करीब 19.33 लाख ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ श्रेणी में बताए गए हैं। इसके अलावा करीब 47.56 लाख नाम प्रारंभिक सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। इन आंकड़ों को लेकर पारदर्शिता और नोटिस के आधार पर भी सवाल उठे हैं।
नाम कटेगा या रहेगा, फैसला दस्तावेजों के बाद
SIR प्रक्रिया में नोटिस मिलना अंतिम कार्रवाई नहीं है। संबंधित मतदाता अपने दस्तावेज और स्पष्टीकरण प्रस्तुत कर सकता है, जिसके बाद रिकॉर्ड की जांच की जाती है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भी स्पष्ट किया है कि प्रारंभिक सूची में नाम नहीं होना अपने-आप मतदाता को अयोग्य घोषित नहीं करता। ऐसे मामलों की जांच निर्धारित नियमों, दस्तावेजों और आवश्यक सत्यापन के आधार पर की जानी है। दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित होने की निर्धारित है।