भारत में जाति आधारित जनगणना की प्रक्रिया अब आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत सोमवार, 16 जून 2025 को अधिसूचना जारी की है, जिससे देशभर में जातिगत जनगणना की आधिकारिक तैयारी आरंभ हो गई है.
भारत में जनगणना की प्रक्रिया हर 10 वर्ष में होती है, और 2021 में होने वाली जनगणना को कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया था. इससे पहले, 2011 में जनगणना हुई थी. अब, 2027 में होने वाली जनगणना के बाद, अगली जनगणना 2035 में होगी, जिससे भविष्य में जनगणना चक्र में बदलाव आएगा.
केंद्र सरकार ने 16वीं जनगणना के लिए अधिसूचना जारी कर दी है, जो 1 मार्च 2027 से शुरू होगी. यह जनगणना दो चरणों में होगी: पहला चरण अक्टूबर 2026 में और दूसरा चरण मार्च 2027 में. इसमें पहली बार जाति आधारित गणना भी शामिल की जाएगी. यह प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल होगी, जिसमें मोबाइल ऐप्स और स्वयं-संख्या (Self-enumeration) का विकल्प होगा. इससे पहले, 2021 में होने वाली जनगणना को कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया था.
इस बदलाव से भविष्य में जनगणना चक्र में बदलाव होगा, जिससे आगामी जनगणनाएं 2035, 2045, 2055 आदि वर्षों में होंगी. इससे नीति निर्माण, संसाधन आवंटन और सामाजिक योजनाओं के लिए आवश्यक डेटा संग्रहण में सहायता मिलेगी.
जनगणना के चरण
भारत में आगामी जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी. पहला चरण, जिसे हाउसिंग सेंसस कहा जाता है, अक्टूबर 2026 में शुरू होगा और हिमालयी राज्यों जैसे लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के हिमाच्छादित क्षेत्रों में 1 अक्टूबर 2026 तक पूरा होगा. दूसरा चरण, पॉपुलेशन सेंसस, मार्च 2027 में शुरू होगा और देश के बाकी हिस्सों में 1 मार्च 2027 तक पूरा होगा.
भारत में जनगणना की प्रक्रिया दो प्रमुख चरणों में आयोजित की जाती है:
1. हाउसिंग सेंसस
इस चरण में घरों की गिनती की जाती है और उनके पास उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी एकत्र की जाती है. इसमें शामिल विषयों में शामिल हैं:
घर का प्रकार (पक्का, कच्चा, अस्थायी)
घर में उपलब्ध सुविधाएं (पेयजल, शौचालय, बिजली, रसोई गैस, आदि)
घर के मुखिया से संबंध
घर में रहने वाले सदस्यों की संख्या
घर के मुखिया का लिंग, आयु, और वैवाहिक स्थिति
घर में रहने वाले लोगों की जाति/उप-जाति, धर्म, और शिक्षा स्तर
घर में रहने वाले लोगों की रोजगार स्थिति
घर में रहने वाले लोगों की प्रवास और निवास की स्थिति
इस चरण का उद्देश्य आवासीय संरचना और घरेलू सुविधाओं की स्थिति का आकलन करना है, ताकि भविष्य की योजनाओं और नीतियों के लिए आधारभूत डेटा उपलब्ध हो सके.
2. पॉपुलेशन सेंसस (Population Census)
इस चरण में प्रत्येक व्यक्ति से जुड़े व्यक्तिगत, सामाजिक और आर्थिक आंकड़े एकत्र किए जाते हैं. इसमें शामिल विषयों में शामिल हैं:
व्यक्ति का नाम, लिंग, आयु, जन्म तिथि और वैवाहिक स्थिति
व्यक्ति की शिक्षा स्तर और साक्षरता
व्यक्ति की रोजगार स्थिति और कार्य क्षेत्र
व्यक्ति का धर्म, जाति/उप-जाति, और मातृभाषा
व्यक्ति का जन्म स्थान और निवास स्थान
व्यक्ति की विकलांगता स्थिति (यदि कोई हो)
व्यक्ति की प्रजनन क्षमता (महिलाओं के लिए)
व्यक्ति का प्रवास इतिहास (कहाँ से कहाँ स्थानांतरित हुए)
इस चरण का उद्देश्य देश की जनसंख्या की संरचना और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का विस्तृत आंकलन करना है, ताकि विभिन्न योजनाओं और नीतियों के लिए आवश्यक डेटा उपलब्ध हो सके.
इस बार क्या है नया?
1. डिजिटल जनगणना (Digital Census)
2. स्वयं-संख्या (Self-enumeration) का विकल्प
3. जाति आधारित जनगणना (Caste Enumeration)
4. 34 लाख कर्मचारियों की भागीदारी
5. 30 से अधिक प्रश्नों का समावेश
पूछे जाने वाले प्रमुख प्रश्न
1. व्यक्तिगत जानकारी:
नाम
लिंग (पुरुष/महिला)
आयु और जन्म तिथि
वैवाहिक स्थिति (विवाहित, अविवाहित, विधवा/विधुर)
धर्म और उपधर्म
जाति/उप-जाति (SC/ST/OBC/अन्य)
मातृभाषा और अन्य ज्ञात भाषाएं
शैक्षिक योग्यता और साक्षरता स्थिति
शारीरिक विकलांगता की स्थिति (यदि कोई हो)
2. रोजगार और आर्थिक स्थिति:
रोजगार की स्थिति (काम करने वाला/नौकरीपेशा, स्व-रोजगार, बेरोजगार)
मुख्य और सहायक व्यवसाय/व्यवसाय क्षेत्र
आय का स्रोत और श्रेणी (सरकारी/निजी/स्व-रोजगार/कृषि श्रमिक/निर्माण श्रमिक/अन्य)
कृषि भूमि का स्वामित्व और आकार
मासिक आय (₹0 से ₹6,000 से लेकर ₹50,000 और उससे अधिक)
3. घर और आवासीय सुविधाएं:
घर का प्रकार (पक्का/कच्चा/झोपड़ी)
घर में उपलब्ध सुविधाएं:
पेयजल
शौचालय
बिजली
रसोई गैस (LPG/PNG)
बाथरूम
रसोईघर
टीवी (DTH या केबल)
इंटरनेट कनेक्शन
लैपटॉप/कंप्यूटर
मोबाइल फोन/स्मार्टफोन
रेडियो/ट्रांजिस्टर
बाइक/स्कूटर/मोटरसाइकिल/मोपेड
कार/जीप/वैन
बाइक/स्कूटर/मोटरसाइकिल/मोपेड
कार/जीप/वैन
मुख्य अनाज (चावल, गेहूँ, मक्का, आदि)
मोबाइल नंबर (केवल जनगणना संबंधित संचार के लिए)
4. प्रवास और निवास की स्थिति:
निवास का स्थान (स्थायी/अस्थायी)
पिछला निवास स्थान (यदि हाल ही में स्थानांतरित हुए हों)
स्थानांतरित होने का कारण (रोजगार, शिक्षा, परिवार, आदि)
स्थानांतरित होने की अवधि
पिछले निवास स्थान पर रहने की अवधि
आंकड़ों का उपयोग कहां होगा?
सामाजिक और आर्थिक योजनाओं की योजना
जाति आधारित आंकड़े सरकार को विभिन्न जाति समूहों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सटीक आकलन करने में मदद करेंगे, जिससे लक्षित कल्याणकारी योजनाओं का निर्माण संभव होगा.
आरक्षण नीति और महिलाओं के लिए सीट आरक्षण
जाति आधारित आंकड़े आरक्षण नीति की समीक्षा और समुचित वितरण में सहायक होंगे. महिला आरक्षण विधेयक के लागू होने के लिए परिसीमन प्रक्रिया आवश्यक है, जो जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होगी.
3.2028 में परिसीमन (Delimitation) की तैयारी
जनगणना के आंकड़ों का उपयोग लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन में किया जाएगा, जिससे प्रतिनिधित्व में समानता सुनिश्चित होगी.
4.राज्यों को मिलने वाली केंद्रीय सहायता में इस डेटा का प्रयोग
जाति आधारित आंकड़ों के माध्यम से राज्यों की वास्तविक जनसंख्या संरचना का पता चलेगा, जिससे केंद्रीय सहायता का वितरण अधिक न्यायसंगत होगा.
5.लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण का भी रास्ता साफ हो सकता है
महिला आरक्षण विधेयक के लागू होने के लिए परिसीमन प्रक्रिया आवश्यक है, जो जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होगी.