छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले से बड़ी खबर सामने आई है। देश के सबसे खतरनाक और वांटेड नक्सली कमांडरों में शामिल माडवी हिडमा सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया। ऑपरेशन के दौरान उसकी पत्नी राजे भी ढेर हो गई। यह मुठभेड़ छत्तीसगढ़–आंध्र प्रदेश बॉर्डर के घने जंगलों में हुई, जहां सुरक्षा बलों की सर्चिंग के दौरान नक्सलियों ने फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में कम से कम 6 नक्सली मार गिराए गए हैं, जिनमें कुछ सीनियर कैडर भी शामिल बताए जा रहे हैं। इलाके में कॉम्बिंग ऑपरेशन जारी है और अभी तक कई हथियार बरामद हुए हैं।
नक्सली संगठन का चेहरा
हिडमा नक्सली संगठन का वह चेहरा था, जिसने बीते एक दशक में कई बड़े खूनी हमलों की साजिश रची। वह PLGA बटालियन नंबर-1 का चीफ़ था, जिसे नक्सलियों की सबसे घातक यूनिट माना जाता है। हिडमा बस्तर क्षेत्र से सेंट्रल कमेटी में शामिल होने वाला एकमात्र आदिवासी था और सबसे युवा सदस्य भी। उसके ऊपर 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। उसका असली नाम संतोष था और वह 1981 में सुकमा के पूवर्ति गांव में पैदा हुआ था।
26 से अधिक बड़े हमलों का आरोप
माडवी हिडमा पर 26 से अधिक बड़े हमलों का आरोप था। 2010 के दंतेवाड़ा हमले में 76 सीआरपीएफ जवानों की हत्या, 2013 के झीरम घाटी नरसंहार में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं सहित 27 लोगों की मौत और 2021 के सुकमा-बीजापुर मुठभेड़ में 22 जवानों की शहादत ये सभी हमले हिडमा की योजना पर अंजाम दिए गए थे। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी तलाश में थीं, लेकिन वह घने जंगलों और स्थानीय नेटवर्क की वजह से हमेशा बच निकलता था।
नक्सल मोर्चे पर सबसे बड़ी सफलता
सूत्रों के मुताबिक, मुठभेड़ के बाद एर्राबोर थाना क्षेत्र में रुक-रुककर फायरिंग जारी है। नक्सलियों की भारी मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर रखा है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि हिडमा का मारा जाना नक्सल मोर्चे पर सबसे बड़ी सफलता है, क्योंकि वह संगठन के सैन्य ढांचे का मुख्य संचालक था। माना जा रहा है कि उसके खत्म होने से नक्सली गतिविधियों को बड़ी चोट पहुंचेगी और बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों के लिए आगे ऑपरेशन आसान होगा।