कल्पना कीजिए—दुनिया पर परमाणु बम गिर चुका है, आसमान राख से भर चुका है, हवा जहर बन गई है और पृथ्वी पर इंसानों सहित ज्यादातर जीव खत्म हो चुके हैं। लेकिन इस प्रलय के बीच एक छोटा-सा जीव बिना डरे, बिना मरे अपनी सांसें जारी रखता है। यह जीव है कॉकरोच, जिसे रेडिएशन, गर्मी और कयामती विस्फोट भी पूरी तरह मिटा नहीं पाते। आखिर इसमें ऐसी कौन-सी खासियत है जो इसे दुनिया का सबसे मजबूत जीव बना देती है?
तबाही के बाद भी दिखे जिंदा कॉकरोच
परमाणु विस्फोटों की तबाही के बाद यह माना जाता है कि पृथ्वी का जीवन असंभव हो जाएगा, लेकिन कई घटनाओं में कॉकरोच बड़ी संख्या में जीवित पाए गए। वैज्ञानिक जब ऐसे क्षेत्रों का निरीक्षण करते हैं, तो उन्हें पता चलता है कि यह जीव रेडिएशन के असर को अप्रत्याशित रूप से सहने की क्षमता रखता है।
रेडिएशन सहने की अविश्वसनीय क्षमता
इंसानों की तुलना में कॉकरोच का शरीर रेडिएशन के प्रति बेहद मजबूत साबित होता है। जहां मनुष्य 800 रैड की रेडिएशन मात्रा में मर सकते हैं, वहीं कॉकरोच लगभग 10,000 रैड तक बगैर खत्म हुए सहन कर लेते हैं। यह अंतर इन्हें पृथ्वी के सबसे सहनशील जीवों में शामिल करता है।
धीमी सेल डिविजन बनाती है उन्हें मजबूत
कॉकरोच के शरीर की कोशिकाएं बेहद धीमी गति से विभाजित होती हैं। इंसानों में कोशिकाएं तेजी से विभाजित होती हैं, इसलिए रेडिएशन उनका अधिक नुकसान करता है। लेकिन कॉकरोच सप्ताह में केवल एक बार सेल डिविजन करते हैं, जिससे रेडिएशन तुरंत उन पर असर नहीं डाल पाता।
विस्फोट के पास मरते हैं, दूरी पर बच जाते हैं
वैज्ञानिक बताते हैं कि परमाणु बम का सबसे बड़ा खतरा रेडिएशन नहीं, बल्कि विस्फोट के तुरंत बाद फैलने वाली तेज गर्मी होती है। विस्फोट के बिलकुल पास मौजूद कॉकरोच भी मर जाते हैं, लेकिन थोड़ी दूरी पर रहने वाले जीव रेडिएशन को मात दे देते हैं।
कयामत में भी जीवित रहने की संभावनाएं
अध्ययन बताते हैं कि अगर पृथ्वी पर कभी इतनी बड़ी तबाही हो गई कि इंसान और बड़े जीव समाप्त हो जाएं, तब भी कॉकरोच जैसे जीव सबसे लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं। उनकी शारीरिक बनावट और सहनशीलता उन्हें धरती का सबसे “अमर” जीव साबित करती है।