मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट में लंबित 27% ओबीसी आरक्षण मामले के बीच अब लाड़ली बहना योजना में ओबीसी वर्ग की महिलाओं को 50% आरक्षण देने की सिफारिश ने नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे के साथ पेश की गई सामाजिक-आर्थिक सर्वे रिपोर्ट में यह सुझाव दिया गया है, जिससे प्रदेश की सियासत में नई हलचल मच गई है।
क्या है मामला
राज्य सरकार ने महू स्थित डॉ. बी.आर. अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय को ओबीसी वर्ग की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का सर्वे करने का जिम्मा दिया था। इस सर्वे रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ओबीसी वर्ग की महिलाएं सरकारी योजनाओं से अपेक्षित लाभ नहीं उठा पा रही हैं। इसलिए उन्हें लाड़ली बहना योजना और अन्य महिला कल्याण योजनाओं में 50% आरक्षण दिया जाना चाहिए।
10 हजार परिवारों से जुटाया गया डेटा
सर्वे टीम ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों के 10 हजार से अधिक ओबीसी परिवारों से बातचीत कर डेटा एकत्र किया। रिपोर्ट में बताया गया है कि ओबीसी वर्ग की अधिकांश आबादी खेती और मजदूरी पर निर्भर है, जिनकी संख्या 90% तक है। वहीं, शिक्षा और रोजगार के अवसर सीमित हैं—करीब 7 हजार परिवार उच्च शिक्षा तक नहीं पहुंच पाए। महिला बेरोजगारी दर 21.3% दर्ज की गई है, जो राज्य औसत से कहीं अधिक है।
सामाजिक भेदभाव और आर्थिक पिछड़ापन
रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि जातिगत भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार आज भी ओबीसी समुदाय की बड़ी समस्या है। 56% परिवारों ने बताया कि उन्हें सामाजिक रूप से बराबरी का व्यवहार नहीं मिलता। वहीं, कई परिवारों को धार्मिक संस्थानों और शिक्षा केंद्रों में प्रवेश तक में भेदभाव झेलना पड़ता है। यह रिपोर्ट बताती है कि सामाजिक न्याय और समान अवसर के लिए ओबीसी आरक्षण नीतियों को और सशक्त बनाना जरूरी है।
सियासी तापमान फिर चढ़ा
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई है। 27% ओबीसी आरक्षण का मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसकी अगली सुनवाई 10 नवंबर 2025 को होनी है। ऐसे में लाड़ली बहना योजना में 50% आरक्षण की सिफारिश से ओबीसी आरक्षण बहस फिर तेज हो गई है।