
11 अक्टूबर 2025, शनिवार का दिन धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत शुभ है। आज शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन है और पंचमी तिथि है, जो मां स्कंदमाता को समर्पित है। इसके साथ ही यह दिन शनि देव की पूजा और व्रत के लिए भी अत्यंत पावन माना जाता है। इस दिन व्रत रखने, पूजन करने और शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए भक्तगण विशेष तैयारी करते हैं। आइए जानते हैं आज के दिन से जुड़ी प्रमुख धार्मिक और ज्योतिषीय जानकारी।
तिथि, वार और नक्षत्र की जानकारी
आज शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है, जो दोपहर बाद तक रहेगी। शनिवार का दिन होने के कारण शनि पूजा का विशेष महत्व है। चंद्रमा आज वृश्चिक राशि में गोचर करेगा और अनुराधा नक्षत्र का संयोग है, जो पूजन के लिए शुभ माना जाता है।
शुभ मुहूर्त और पूजन का समय
आज के दिन पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों के लिए कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं।
ब्राह्म मुहूर्त: सुबह 4:42 से 5:30 तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:43 से 12:30 तक
शनि पूजा का उत्तम समय: सुबह 6:45 से 8:30 तक और शाम को 5:15 से 6:45 तक
इन समयों में शनिदेव की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। तिल का दीपक जलाना, पीपल वृक्ष की पूजा और शनि स्तोत्र का पाठ करने से जीवन की परेशानियों में राहत मिलती है।
राहुकाल और भद्राकाल की स्थिति
राहुकाल: सुबह 9:00 से 10:30 तक रहेगा। इस दौरान किसी भी प्रकार के शुभ कार्य करने से बचना चाहिए।
भद्राकाल: आज भद्रा नहीं है, इसलिए पूरे दिन पूजन एवं शुभ कार्य किए जा सकते हैं।
दिशाशूल और यात्रा संकेत
शनिवार को दिशाशूल पूर्व दिशा में रहता है। यदि इस दिशा में यात्रा करनी हो तो दही या अदरक का सेवन कर यात्रा शुरू करने की सलाह दी जाती है। यह उपाय नकारात्मक ऊर्जा से बचाने में सहायक माना जाता है।
शनिवार व्रत और शनि पूजा का महत्व
शनिवार का व्रत विशेष रूप से शनि देव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। जिन जातकों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो, उनके लिए यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। काले तिल, काले वस्त्र और सरसों के तेल से शनिदेव का पूजन करने से शनि दोष शांत होता है। हनुमान चालीसा और शनि चालीसा का पाठ करने से मानसिक शांति और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।