नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने और दुष्कर्म करने के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायालय ने आरोपी पर कुल 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
पीड़िता के पिता ने वर्ष 2021 में मुकदमा दर्ज कराया था
यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (पोक्सो एक्ट) ज्ञानेन्द्र सिंह यादव की अदालत ने सुनाया। विशेष लोक अभियोजक हरेंद्र त्यागी ने बताया कि यह मामला धौलाना थाना क्षेत्र के एक गांव से जुड़ा है। पीड़िता के पिता ने वर्ष 2021 में मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनकी नाबालिग पुत्री को 15 फरवरी 2021 की रात को ललित नामक युवक बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया
मुकदमे के अनुसार आरोपी ललित, जो मूल रूप से बुलंदशहर जनपद के जहागीराबाद थाना क्षेत्र के ग्राम अधियार बौड़ा का निवासी है और वर्तमान में वायु सेना एंक्लेव में रह रहा था, ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर किशोरी का अपहरण किया। घटना के बाद परिजनों ने कई स्थानों पर तलाश की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही किशोरी को भी बरामद कर लिया गया। जांच के बाद पुलिस ने आरोपी ललित के खिलाफ बहला-फुसलाकर ले जाने और दुष्कर्म करने के आरोप में चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी
न्यायालय ने धारा 363 के तहत 3 वर्ष का सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये का अर्थदंड, धारा 366 के तहत 3 वर्ष का सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये का अर्थदंड तथा पोक्सो एक्ट की धारा 3/4 के तहत 10 वर्ष का सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त सजा भी भुगतनी होगी।