Oil India Gas Discovery : भारत को समुद्र के भीतर प्राकृतिक गैस का नया भंडार मिला है। सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड ने कृष्णा-गोदावरी बेसिन में गैस की खोज की है। यह खोज समुद्र के उथले पानी में स्थित एक ऐसे क्षेत्र में हुई है, जहां पहले जांच नहीं की गई थी। कंपनी ने यह ब्लॉक डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड यानी DSF की बोली प्रक्रिया के जरिए हासिल किया था। इस खोज से देश में प्राकृतिक गैस के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है। ऐसे में देश के भीतर गैस का नया भंडार मिलना ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
गोदावरी-1 कुएं में मिली सफलता
ऑयल इंडिया ने कृष्णा-गोदावरी बेसिन के मत्स्यपुरी फॉर्मेशन में गैस की खोज की है। यह खोज KG-DSF/GSKW/2028 ब्लॉक के गोदावरी-1 कुएं में हुई। कंपनी ने 16 अक्टूबर 2026 को इस कुएं में करीब 2,027 मीटर की गहराई पर गैस की जांच शुरू की थी। शुरुआती जांच में ही प्राकृतिक गैस का प्रवाह मिलने लगा। खास बात यह है कि इस जगह पर पहले कभी जांच नहीं हुई थी। ऐसे में यहां गैस मिलने से इस क्षेत्र में आगे की खोज और उत्पादन की संभावनाओं को लेकर उम्मीद बढ़ी है।
शुरुआत में रोजाना एक लाख SCMD गैस
कंपनी की शुरुआती जांच में प्रतिदिन करीब एक लाख स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर यानी SCMD प्राकृतिक गैस का प्रवाह दर्ज किया गया। इसके बाद लगातार जांच के दौरान गैस का प्रवाह बढ़कर करीब दो लाख SCMD तक पहुंच गया। यह आंकड़ा कुएं में गैस के प्रवाह को दर्शाता है। हालांकि, किसी कुएं से शुरुआती जांच में मिलने वाला प्रवाह और लंबे समय तक होने वाला व्यावसायिक उत्पादन अलग-अलग बातें हैं। आगे यह जानना जरूरी होगा कि इस भंडार से कितनी गैस लगातार निकाली जा सकती है और उत्पादन शुरू करने के लिए किन तैयारियों की जरूरत होगी।
गैस के साथ कंडेनसेट भी मिला
ऑयल इंडिया के मुताबिक, इस कुएं से रोजाना करीब 170 बैरल कंडेनसेट मिलने की जानकारी भी सामने आई है। कंडेनसेट हल्के तरल हाइड्रोकार्बन का मिश्रण होता है, जो प्राकृतिक गैस के साथ मिल सकता है। इसका इस्तेमाल पेट्रोलियम उत्पाद बनाने की प्रक्रिया में किया जा सकता है। गैस के साथ कंडेनसेट मिलना इस खोज को और अहम बनाता है। हालांकि, इस भंडार से होने वाली कुल कमाई और उत्पादन की लागत का अंदाजा लगाने के लिए विस्तृत जांच और व्यावसायिक उत्पादन से जुड़े आंकड़ों की जरूरत होगी।
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भारत को क्या फायदा हो सकता है?
भारत में बिजली उत्पादन, उद्योगों, उर्वरक बनाने और घरेलू इस्तेमाल के लिए प्राकृतिक गैस की जरूरत होती है। देश अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर नए गैस भंडार मिलने से भविष्य में आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। अगर ऑयल इंडिया इस खोज से व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन शुरू करने में सफल रहती है, तो घरेलू गैस की उपलब्धता बढ़ सकती है। इससे ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसका वास्तविक असर उत्पादन की मात्रा और लागत पर निर्भर करेगा।
अब उत्पादन की संभावनाओं पर नजर
कृष्णा-गोदावरी बेसिन में मिली इस गैस से भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में नई उम्मीद जगी है। शुरुआती जांच में गैस का प्रवाह एक लाख से बढ़कर दो लाख SCMD तक पहुंचना कंपनी के लिए अहम संकेत है। अब आगे की जांच से यह स्पष्ट होगा कि भंडार कितना बड़ा है और यहां से लंबे समय तक कितना उत्पादन किया जा सकता है। यदि यह खोज व्यावसायिक रूप से सफल रहती है, तो घरेलू गैस आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिल सकती है। फिलहाल, इस खोज की वास्तविक उपयोगिता आगे होने वाली जांच और उत्पादन की योजना से तय होगी।