दिल्ली में पुराने पेट्रोल-डीज़ल वाहनों पर कार्रवाई तेज़ होने के बाद, अब नोएडा में भी ट्रैफिक पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है. मंगलवार को पेट्रोल वाहनों के 10 और डीजल वाहनों के 13 पुराने मॉडल जब्त किए गए. इनमें से कई लोग नियम का पता न होने के बहानों का सहारा लेते दिखे, पर पुलिस ने इन बहानों को स्वीकार नहीं किया और वाहनों को स्क्रैप प्रक्रिया के लिए भेज दिया है. दिल्ली में 1 जुलाई से 15+ साल पुराने पेट्रोल और 10+ साल पुराने डीजल वाहनों को ईंधन न देने और जब्त कर स्क्रैपिंग के आदेश लागू हुए हैं. इसके तहत ANPR कैमरों द्वारा वाहनों की उम्र चेक की जाती है और जो नियमों के उल्लंघन में पाए जाते हैं उन्हें न सिर्फ ईंधन नहीं मिलता, बल्कि जब्त भी कर लिया जाता है.
दिल्ली पुलिस के नक्शेकदम पर नोएडा पुलिस
नोएडा पुलिस ने इसी दिशा में कदम बढ़ाया है. नियमानुसार अब ऐसे वाहनों को चलाने पर रोक लगी हुई है. DCP (Traffic) ने स्पष्ट किया कि 10+ साल पुराने डीजल और 15+ साल पुराने पेट्रोल/सीएनजी वाहन सड़क पर नहीं चलाए जा सकते. उल्लंघन करने वाले वाहनों को जब्त कर स्क्रैप प्रक्रिया में भेजा जाएगा.
बे'कार' पहुंचे घर!
बता दें कि दिल्ली की सीमा पार कर कुछ लोग ईंधन लेने पहुंचे, लेकिन वहां पुलिस ने ऐसे वाहनों को जब्त कर स्क्रैप रसीद जारी कर दी. कुछ लोग अपनी पुरानी गाड़ी वहीं छोड़कर मेट्रो और कैब के सहारे नोएडा लौटे. जैसे ही उनकी गाड़ी जब्त हुई, वो पैदल या किराये की गाड़ी से घर पहुंचे. एक उदाहरण के अनुसार, अनवर नाम का एक शख्स सिल्वर ओक स्थित चिल्ला बॉर्डर से कुछ ही किलोमीटर आगे था कि पुलिस ने उसकी 10 साल पुरानी डीजल कार पकड़ ली. उसने कुछ मोहलत की मांग की, लेकिन पुलिस ने उसकी एक न सुनी और उसे पैदल छोड़ दिया. उसके बाद ही वह मेट्रो और कैब कि़राए पर घर लौटा.
क्या है आगे का रोडमैप?
नोएडा में अभी तक स्क्रैप सेंटर नहीं बना है. इसका निर्माण प्रस्तावित है लेकिन अभी तक शुरू नहीं हो सका. मामला अभी भी सरकारी व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है. वहीं नवंबर 2025 तक NCR के अन्य हिस्सों जैसे नोएडा और गाजियाबाद में ANPR कैमरों से लैस ईंधन स्टेशनों की स्थापना की जा रही है. तब यह अभियान और व्यापक होगा.
वहीं गौतम बुद्ध नगर जिले में लगभग 2.88 लाख पुराने नॉन-कमर्शियल वाहन पाये जाते हैं, जिनमें से 1.7 लाख से अधिक सिर्फ नॉन-कमर्शियल हैं. साथ ही कमर्शियल वाहनों की संख्या 30 हजार से ज़्यादा है.
बता दें कि जब वाहन जब्त होता है, तो पुलिस उसे स्क्रैप सेंटर में भेजने का नोटिस देती है. लेकिन जब स्क्रैप सेंटर ही नहीं होता, तो पुलिस को लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है जिसमें वाहन ट्रांजिट, डॉक्यूमेंटेशन और डी-रजिस्ट्रेशन शामिल है. अब सवाल यह है कि क्या सरकार और प्रशासन समय रहते व्यवस्था बना पाएंगे?