लाल किले के पास हुए धमाके के बाद से रोजना नए-नए खुलासे हो रहे हैं। इस बीच अल फलाह विश्वविद्यालय में दवाइयां सप्लाई करने वाले दिनेश खत्री ने जानकारी दी है कि वह डॉक्टर मुजम्मिल, डॉक्टर शाहीन, डॉक्टर उमर और डॉक्टर निसार, इन सभी को अच्छी तरह पहचानते हैं। उनका काम अल-फलाह विश्वविद्यालय में दवाइयों की सप्लाई करना है। ऐसे में इन डॉक्टरों से अक्सर मिलते-जुलते रहे हैं। उनके अनुसार डॉक्टरों का व्यवहार सामान्य था, लेकिन उमर का नेचर थोड़ा रूखा था और ओपीडी भी कम लिया करता था। बड़ा गुस्से में रहता है।
फतेहपुर तगा के लोगों की राय और अनुभव
गांव में मौजूद कई लोगों ने बताया कि डॉक्टर मुजम्मिल को उन्होंने अस्पताल में काम करते हुए देखा है। स्थानीय लोगों के अनुसार डॉक्टर शाहीन और डॉक्टर मुजम्मिल समय-समय पर गांव में आते थे, और कई बार बीमार ग्रामीणों का चेकअप भी करते थे। एक शक्श ने पुष्टि भी की है कि वह दोनों डॉक्टरों को लंबे समय से पहचानते हैं और इलाज के दौरान उनसे कई बार मुलाकात हुई है अक्सर गांव में डॉक्टर शाहीन अल फलाह विश्वविद्यालय के मेडिकल वाले छात्रों के साथ गांव में भी आया करती थी जब गांव के लोगों के रूटीन चेकअप होते थे या जब मेडिकल कैंप लगा करता था।
अस्पताल को लेकर चिंता और मांग
गांव के बुजुर्गों लोगों ने साफ कहा कि यह अस्पताल अब सरकार के नियंत्रण में आ जाना चाहिए, ताकि यहां सरकारी व्यवस्था के तहत इलाज मिल सके। लोगों का तर्क है कि अगर यह अस्पताल बंद हो जाता है, तो फतेहपुर तगा ही नहीं बल्कि आसपास के कई गांवों को भारी परेशानी होगी, क्योंकि यही उनके इलाज का सबसे नजदीकी सहारा है। वही गांव के लोगों ने बताया कि पुलिस रेड के बाद लगा बड़ा झटका उनको लगा है। फतेहपुर तगा में तब हड़कंप मच गया जब पुलिस की रेड के दौरान यह जानकारी सामने आई कि डॉक्टर मुजम्मिल ने गांव में विस्फोट सामग्री छुपा रखी थी। इस खुलासे ने ग्रामीणों को स्तब्ध कर दिया है और लोग अब पूरे मामले की सच्चाई जानने को बेताब हैं।