Guru Purnima Speech 2026: गुरु पूर्णिमा इस साल आज यानि 29 जुलाई को मनाया जा रहा है। इस दिन छात्र गुरुओं के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सम्मान प्रकट करते हैं। यह परंपरा हजारों सालों से चली आ रही है। प्राचीन ग्रंथों से लेकर किताबों में गुरु की महिमा को बतलाया गया है। ऐसे में छात्र स्कूलों में भाषण देते हैं और गुरुओं का धन्यवाद कहते हैं। तो आइए जानते हैं कि छात्र स्कूलों में भाषण कैसे दें।
कैसे करें शुरुआत
'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः" इस पंक्ति के साथ अपने भाषण की शुरुआत करें। इसके बाद आदरणीय प्रधानाचार्य और अपने शिक्षकों को सादर प्रणाम करें। इसके बाद बोले आज का दिन उस शक्ति को समर्पित है, जिसके बिना ज्ञान, सफलता और जीवन की हर जीत अधूरी है, वह शक्ति है हमारे गरू।
गुरु को मेरा कोटि-कोटि प्रणाम
भारतीय संस्कृति में कहा गया है कि 'अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया। चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः' अर्थात जो गुरु हमारे अज्ञान रूपी अंधेरे को ज्ञान के प्रकाश से दूर कर देते हैं, ऐसे गुरु को मेरा कोटि-कोटि प्रणाम है। इसके बाद बोले साथियों, गुरु पूर्णिमा केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह अपने शिक्षकों के प्रति आभार और सम्मान व्यक्त करने का उत्सव है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि आज हमारे जीवन में जो भी अच्छाई, अच्छे संस्कार और सफलता है, वह सब हमारे गुरुआों के मार्गदर्शन की ही देन है।
गुरु का महत्व
अपनी भाषण में गुरु का महत्व भी बताएं। इसके लिए बोले आज भले ही दुनिया तेजी से बदल रही हो और इंटरनेट के जरिए हमें सभी तरह की जानकारी भी मिल जाती है, लेकिन ज्ञान का सही विवेक गुरु ही देते हैं। इसलिए संत कबीरदास जी ने गुरु की महिमा बताते हुए लिखा है कि 'गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय'। इसका अर्थ यह है कि अगर गुरु और ईश्वर दोनों एक साथ सामने खड़े हों, तो सबसे पहले प्रणाम गुरु को करना चाहिए, क्योंकि गुरु ही हमें ईश्वर तक पहुंचने का रास्ता दिखाते हैं।
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गुरु आगे बढ़ने की देते हैं प्रेरणा
मेरे प्रिय साथियों! गुरु केवल हमें हमारे सिलेबस की किताबें नहीं पढ़ाते, वे हमें जीवन जीने का असल तरीका भी सिखाते हैं। वे सिर्फ परीक्षा में अच्छे नंबर लाना नहीं, बल्कि हमारे चरित्र को मजबूत बनाता भी सिखाते हैं। जब भी हम हार मानने लगते हैं, तो गुरु ही हमारे अंदर विश्वास का दीया जगाते हैं और हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
गुरु के लिए सुंदर पंक्ति
गुरु की महिमा में एक सुंदर पंक्ति भी कही गई है। 'दीपक स्वयं जलता है, तभी दूसरों को प्रकाश देता है, ठीक उसी प्रकार गुरु स्वयं तपकर शिष्यों का जीवन उज्ज्वल बनाते हैं।' आगे बोले कि गुरु की ऋण हम सिर्फ शब्दों से नहीं चुका सकते। उनका सम्मान केवल गुरु पूर्णिमा के दिन नहीं बल्कि उनके बताए मार्ग पर हर दिन चलकर किया जाता है।
इसके साथ ही एक और सुंदर पंक्ति जोड़ें और बोले ' अक्षर-अक्षर हमें सिखाते, शब्द-शब्द का अर्थ बताते, कभी प्यार से तो कभी डांट से, जीवन जीना हमें सिखाते।' इसका अर्थ है कि गुरु हमें शुरुआत से एक-एक अक्षर लिखता और हर शब्द का सही मतलब समझना सिखाते हैं। जब हम भटकते हैं, तो वे प्यार से समझातें हैं और जरूरत पड़ने पर डांटकर हमें सही रास्ते पर लाते हैं। इस तरह वे हमें सिर्फ पढ़ाते नहीं, बल्कि जिंदगी को सही तरीके से जीना सिखाते हैं।
क्यों मनाया जाता है गुरु पूर्णिमा
अपने भाषाण में बताए कि गुरु पूर्णिमा कब और क्यों मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा हर साल आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को मनाई जाती है। इसी दिन गुरु महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ थी, जिन्होंने हमें ज्ञान का अमूल्य भंडार दिया। इसलिए इस पावन दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।
भाषण का अंत ऐसे करें
अंत में गुरुओं के लिए एक प्यारी सी पंक्ति जोड़ें और बोले रोशनी बनकर जो आए हमारी जिंदगी में, ऐसे गुरुओं को मैं प्रणाम करता हूं। जमीं से उठाकर जो पहुंचा दिया आसमां तक, ऐसे शिक्षकों को मैं दिल से सलाम करता हूं। गुरु केवल हमें किताबों और सिलेबस नहीं पढ़ाते, वे हमें जीवन जीने का सही तरीका सिखाते हैं। आइए आज हम सभी संकल्प लेते हैं कि अपने गुरुओं के प्रति सम्मान, विश्वास और कृतज्ञता को अपने जीवन में उतारेंगे और हमेशा आगे बढ़ते रहेंगे। इसी के साथ में सभी टीचर्स को मेरा विनम्र प्रणाम।