कई दिनों से भारतीय क्रिकेट फैंस और एक्सपर्ट्स एक ही सवाल उठा रहे थे कि संजू सैमसन को आखिर मौका क्यों नहीं मिल रहा। शुभमन गिल की लगातार नाकामी के बावजूद संजू को बेंच पर बैठाए रखा गया। लेकिन अहमदाबाद में साउथ अफ्रीका के खिलाफ आखिरी टी20 मैच में जैसे ही संजू सैमसन को मौका मिला, तस्वीर बदल गई। यह कोई आम पारी नहीं थी, बल्कि उस इंतजार का जवाब थी जो लंबे समय से खिंचता आ रहा था। मैदान में उतरते ही संजू ने साफ कर दिया कि वे दबाव में नहीं, बल्कि तैयार होकर आए हैं।
ओपनिंग में उतरते ही बदला मैच का मिजाज
अभिषेक शर्मा के साथ ओपनिंग करते हुए संजू सैमसन ने दूसरे ही ओवर में छक्का लगाकर अपने इरादे जाहिर कर दिए। इसके बाद चौकों की बौछार शुरू हो गई और पावरप्ले के अंदर ही भारत का स्कोर 60 रन के पार पहुंच गया। अफ्रीकी गेंदबाजों पर दबाव साफ दिख रहा था। यह कोई नया प्रयोग नहीं था, बल्कि वही पुरानी तस्वीर थी जो संजू पहले भी दिखा चुके हैं। तेज शुरुआत, आक्रामक सोच और गेंदबाजों पर लगातार हमला, यही उनकी पहचान रही है।
एक पारी में गिल से आगे निकले सैमसन
भले ही संजू सैमसन अर्धशतक नहीं लगा पाए और 10वें ओवर में आउट हो गए, लेकिन तब तक वह अपना काम कर चुके थे। सिर्फ 22 गेंदों पर 37 रन बनाकर उन्होंने वह कर दिखाया जो शुभमन गिल तीन मैचों में नहीं कर सके। गिल ने तीन मुकाबलों में 28 गेंदें खेलकर 32 रन बनाए, जबकि संजू ने एक ही पारी में उससे ज्यादा असर डाला। फर्क सिर्फ आंकड़ों का नहीं, बल्कि प्रभाव का था। संजू ने कम समय में ज्यादा दबाव बनाया और मैच की दिशा तय कर दी।
वर्ल्ड कप से पहले चयनकर्ताओं के सामने सवाल
संजू सैमसन की यह पारी ऐसे समय आई है जब टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए टीम इंडिया का ऐलान होने वाला है। टीम चयन से ठीक पहले आई इस पारी ने अजीत अगरकर और गौतम गंभीर के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब यह बहस नहीं रह गई कि कौन बेहतर बल्लेबाज है, बल्कि यह तय करने का वक्त है कि कौन बड़े टूर्नामेंट के लिए ज्यादा तैयार है। एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि ओपनिंग में संजू सैमसन कोई प्रयोग नहीं, बल्कि आजमाया हुआ विकल्प हैं। अब फैसला टीम मैनेजमेंट के हाथ में है कि वह इस सच्चाई को स्वीकार करता है या फिर एक बार फिर वही गलती दोहराई जाती है।