क्या भारत एक चाल से तीन दुश्मनों को खाक कर सकता हैं, अगर आप सोच रहे ऐसा कैसे, तो इसका जवाब आज आपको बताते हैं, दरअसल तुर्की, अजर-बैजान और पाकिस्तान इन तीन देशों के अरमानों पर भारत पानी फेर सकता है, जिसके लिए एक चाल चलनी पड़ेगी, यानी बस एक रास्ता भारत अपनाएगा और इन तीन देशों में हाहाकार मच जाएगा, खबरों की मानें तो ये रास्ता अगर भारत में बनने दिया गया तो रणनीति, सुरक्षा और पड़ोस की राजनीति सब कुछ बदल जाएगी.
भारत और पूरे वेस्ट एशिया के लिए फायदे का सौदा
रिपोर्ट्स की मानें तो इस रास्ते का नाम जंगेजूर कॉरिडोर है, जो दिखता तो एक सड़क जैसा है लेकिन असल में यह एक छुपा हुआ मोर्चा है. भारत के लिए भी और पूरे वेस्ट एशिया के लिए भी. दरअसल भारत पिछले कुछ सालों से आर्मेनिया का एक मजबूत दोस्त बना हुआ है. उसने आर्मेनिया को आधुनिक हथियार जैसे स्वाति रडार, पिनाका रॉकेट सिस्टम और एंटी टैंक मिसाइलें दी हैं. इसका कारण है अज़र-बैजान, तुर्की और पाकिस्तान की बढ़ती दोस्ती.
आखिर जंगेचूर कॉरिडोर है क्या?
दरअसल ये एक ऐसा रास्ता है जिसे अज़र-बैजान बनाना चाहता है ताकि उसका संपर्क उसके ही एक अलग हिस्से नखचीवान से जुड़ा सके. ये रास्ता आर्मेनिया के एक हिस्से से होकर गुजरेगा और यही आर्मेनिया और ईरान को जोड़ता है. अगर ये कॉरिडोर बनता है तो अज़र-बैजान और तुर्की का सीधा जमीनी संपर्क हो जाएगा लेकिन इससे आर्मेनिया पूरी तरह घिर जाएगा. उसका ईरान से संपर्क कट जाएगा और यह उसकी संप्रभुता पर सीधा खतरा होगा. सिर्फ आर्मेनिया ही नहीं भारत की रणनीति पर भी इसका असर पड़ेगा.
जंगजूर कॉरिडोर से मिल सकता है बड़ा झटका
खबरों की मानें तो भारत ईरान के चाबहार पोर्ट पर निवेश कर रहा है और आईएएसटीसी नाम का कॉरिडोर बना रहा है जो भारत को रशिया और यूरोप से जोड़ता है बिना पाकिस्तान से होकर लेकिन जंगजूर कॉरिडोर बनता है तो तुर्की, अज़र-बैजान और चाइना मिलकर एक नई ट्रेड रूट बना सकते हैं जो भारत के लिए एक बड़ा झटका होगा. ये सीधा सीपीईसी का एक्सटेंशन बन सकता है जिससे भारत को और घेरने की कोशिश होगी. अब इसमें भारत क्या कर सकता है?
कनेक्टिविटी स्ट्रेटजी से मिलेगी तीन देशों को मात
भारत को अब सिर्फ हथियार नहीं बल्कि आर्मेनिया को डिप्लोमेटिक, आर्थिक और सैन्य समर्थन खुलकर देना होगा. भारत के पास ब्रह्मोस और आकाश जैसे हथियार हैं जिनसे अज़रबजान और तुर्की डरते हैं साथ ही भारत को ईरान और रशिया के साथ मिलकर अपनी कनेक्टिविटी स्ट्रेटजी को तेजी से आगे बढ़ाना होगा. भारत को अब इस कॉरिडोर को सिर्फ एक स्थानीय मुद्दा नहीं मना मानना चाहिए अगर तुर्की और अज़र-बैजान पाकिस्तान के साथ खड़े हो सकते हैं तो भारत को भी अपना खतरनाक जवाब तैयार रखना चाहिए.