त्योहारों के मौसम में प्याज की बढ़ती कीमतों से परेशान लोगों के लिए राहत की उम्मीद है। बाजार में नई खरीफ फसल की आवक बढ़ने के साथ आने वाले हफ्तों में प्याज के दाम कम हो सकते हैं। दशहरा, दिवाली और छठ जैसे त्योहारों के बीच प्याज हर रसोई की जरूरत है। ऐसे में इसकी कीमतों में कमी आने से आम परिवारों के रसोई का बजट संभल सकता है।
अभी 53 रुपये किलो के करीब है प्याज का भाव
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 10 अक्टूबर 2026 को प्याज की औसत खुदरा कीमत 52.99 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई। एक साल पहले इसी समय प्याज करीब 26.65 रुपये प्रति किलो मिल रहा था। यानी पिछले साल के मुकाबले कीमत लगभग दोगुनी हो गई है। हालांकि, एक महीने पहले के 53.10 रुपये प्रति किलो के भाव से इसमें मामूली कमी आई है। थोक बाजार में भी प्याज की कीमतें पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा बनी हुई हैं।
नवंबर तक बाजार में बढ़ सकती है सप्लाई
प्याज की कीमतों में राहत मिलने की बड़ी वजह नई खरीफ फसल है। आमतौर पर सितंबर के आखिर से नवंबर तक नई फसल मंडियों में पहुंचने लगती है। इस बार भी कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और दूसरे प्याज उत्पादक राज्यों से नई फसल की आवक शुरू हो गई है। आने वाले हफ्तों में सप्लाई बढ़ने से बाजार में प्याज की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में रखे पुराने प्याज का स्टॉक भी मांग पूरी करने में मदद कर सकता है।
सरकार भी प्याज की सप्लाई बढ़ाने में जुटी
प्याज की कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार अपने सुरक्षित भंडार से भी प्याज बाजार तक पहुंचा रही है। इसके लिए सड़क और रेल के जरिए अलग-अलग शहरों में प्याज भेजा जा रहा है। सरकार ने अपनी इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाया है, ताकि जिन बाजारों में कीमतें ज्यादा हैं, वहां सप्लाई बेहतर की जा सके। नई फसल के साथ सरकारी भंडार से मिलने वाला प्याज भी आम लोगों को राहत देने में मदद कर सकता है।
त्योहारों से पहले कितनी सस्ती होगी प्याज
आने वाले हफ्तों में प्याज की कीमतें कम होने की उम्मीद जरूर है, लेकिन राहत कितनी मिलेगी, यह बाजार में आने वाली फसल और सप्लाई पर निर्भर करेगा। अगर फसल की आवक तेजी से बढ़ती है और मौसम के कारण परिवहन में परेशानी नहीं आती, तो कीमतों में गिरावट आ सकती है। हालांकि, अभी यह कहना मुश्किल है कि प्याज किस भाव पर बिकेगा। फिलहाल खरीदारों को बाजार के भाव पर नजर रखनी चाहिए।