Onion Prices Rise
: रसोई में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली चीजों में प्याज एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। केंद्र सरकार ने कीमतों को काबू में रखने के लिए बफर स्टॉक से प्याज 35 रुपये प्रति किलो की दर से बेचना शुरू किया है। इसके बावजूद देश में प्याज का औसत खुदरा भाव कम होने के बजाय बढ़ गया है। 28 अगस्त को औसत भाव 48.50 रुपये प्रति किलो था, जो 5 सितंबर को बढ़कर 50.79 रुपये प्रति किलो हो गया।
सरकारी प्याज 35 रुपये किलो
महंगाई से राहत देने के लिए सरकार ने अपने बफर स्टॉक का प्याज बाजार में उतारा है। इसे एनसीसीएफ, नेफेड, केंद्रीय भंडार और मोबाइल वैन के जरिए चुनिंदा जगहों पर 35 रुपये किलो बेचा जा रहा है। सरकार ने इसके लिए रेल और सड़क दोनों रास्तों का इस्तेमाल शुरू किया है।
फिर क्यों बढ़ रहा है बाजार भाव?
सरकारी बिक्री के बावजूद खुले बाजार में प्याज की कीमत बढ़ने के पीछे मांग और आपूर्ति का अंतर अहम वजह माना जा रहा है। अलग-अलग शहरों में कीमतों में काफी अंतर भी देखने को मिल रहा है। 5 सितंबर को दिल्ली में प्याज 58 रुपये, मुंबई में 53 रुपये और चेन्नई में 63 रुपये किलो तक बिका।
17 शहरों में पहुंचा सस्ता प्याज
सरकार के मुताबिक शुरुआती 10 दिनों में 17 शहरों में करीब 4,000 टन बफर प्याज बेचा जा चुका है। इसके अलावा 2026 के लिए सरकार के पास करीब 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक मौजूद है। जरूरत के हिसाब से इसे अलग-अलग शहरों में भेजा जा रहा है।
अक्टूबर में मिल सकती है राहत
आने वाले समय में नई खरीफ प्याज की फसल बाजार में आने से स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है। नई फसल की आवक बढ़ने पर बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ सकती है, जिससे कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। हालांकि, तब तक आम लोगों को प्याज खरीदने में ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है।
घर के बजट पर बढ़ रहा असर
प्याज की कीमत बढ़ने का सीधा असर रसोई के खर्च पर पड़ता है। खासकर मध्यम और कम आय वाले परिवारों के लिए लगातार बढ़ती कीमत परेशानी बढ़ा सकती है। सरकार की सस्ती प्याज योजना से कुछ लोगों को राहत जरूर मिल रही है, लेकिन देशभर के औसत बाजार भाव में अभी कमी नहीं आई है। आने वाले दिनों में सरकारी सप्लाई और नई फसल की आवक यह तय करेगी कि प्याज के दाम नीचे आते हैं या नहीं।