Online Friendship Scam : आज के दौर में सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने नए लोगों से दोस्ती करना आसान बना दिया है। लेकिन यही सुविधा अब साइबर अपराधियों के लिए ठगी का नया रास्ता भी बनती जा रही है। अपराधी पहले भरोसा जीतते हैं, बातचीत बढ़ाते हैं और फिर किसी न किसी बहाने पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं। खासकर अकेलेपन का सामना कर रहे लोगों को इस तरह के जाल में फंसाने की कोशिश की जा रही है।
बातचीत से शुरू होता है पूरा खेल
इस तरह की ठगी में अपराधी आमतौर पर बेहद सामान्य तरीके से बातचीत शुरू करता है। सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप या डेटिंग प्लेटफॉर्म पर दोस्ती की पहल की जाती है। सामने वाले की पसंद, काम और निजी परेशानियों के बारे में धीरे-धीरे जानकारी जुटाई जाती है। कुछ दिनों तक लगातार बातचीत करके ऐसा माहौल बनाया जाता है कि पीड़ित को सामने वाला कोई करीबी और भरोसेमंद व्यक्ति लगने लगे। यहीं से ठगी का अगला चरण शुरू होता है।
भावनाओं को बनाया जाता है हथियार
साइबर अपराधियों की सबसे बड़ी चाल यही होती है कि वे सिर्फ पैसे पर नहीं, बल्कि भावनाओं पर निशाना साधते हैं। अकेलेपन, रिश्तों की जरूरत और भावनात्मक जुड़ाव को समझकर अपराधी खुद को बेहद संवेदनशील और भरोसेमंद दिखा सकता है। इसके बाद अचानक कोई परेशानी, आपात स्थिति या आर्थिक जरूरत बताकर मदद मांगी जाती है। कभी इलाज, कभी यात्रा, कभी किसी जरूरी भुगतान का बहाना बनाया जाता है। भावनात्मक दबाव बढ़ने पर पीड़ित बिना ज्यादा जांच-पड़ताल किए पैसे भेज सकता है।
छोटी रकम से शुरू हो सकता है बड़ा नुकसान
कई मामलों में शुरुआत छोटी रकम से होती है। पहली बार पैसा मिलने के बाद अपराधी दोबारा किसी नई समस्या का बहाना बनाता है। धीरे-धीरे रकम बढ़ती जाती है और पीड़ित को समझ आने तक काफी नुकसान हो चुका होता है। कुछ मामलों में अपराधी पहचान छिपाने के लिए नकली तस्वीर, फर्जी नाम और दूसरे लोगों की तस्वीरों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।
इसे भी पढ़ें : यूपी के शहरों में खुलेगा पक्के घर का रास्ता, 73 हजार से ज्यादा मकानों को मंजूरी
भरोसा करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
ऑनलाइन बनी नई दोस्ती में कभी भी निजी जानकारी, बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी या पासवर्ड साझा नहीं करना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति लगातार पैसे मांग रहा है या भावनात्मक दबाव बना रहा है तो इसे खतरे का संकेत मानना जरूरी है। किसी नए ऑनलाइन संपर्क से जुड़ी आर्थिक मांग पर तुरंत भरोसा करने के बजाय उसकी पहचान स्वतंत्र तरीके से जांचें। संदिग्ध लेनदेन होने पर बैंक और संबंधित साइबर अपराध प्राधिकरण को तुरंत सूचना देना नुकसान को बढ़ने से रोक सकता है। ऑनलाइन दोस्ती गलत नहीं है, लेकिन भरोसा करने से पहले पहचान की पुष्टि और पैसे के मामले में सावधानी सबसे जरूरी है।