UP News: यूपी में पहले जहां सरकारी स्कूलों की छवि कमजोर थी, अब ऑपरेशन कायाकल्प से हजारों स्कूल आधुनिक, स्वच्छ और सुरक्षित बन चुके हैं। नामांकन बढ़ा है, ड्रॉपआउट दर घटी है और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं लाखों बच्चों तक पहुंची हैं। योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं, जिनका उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना, बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और बच्चों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 2017 से अब तक कई योजनाएं लागू की गई हैं, जिनमें ऑपरेशन कायाकल्प, प्रोजेक्ट अलंकार, रोड टू स्कूल, और स्कूल पेयरिंग व्यवस्था प्रमुख हैं। इनके तहत जर्जर स्कूलों का नवीनीकरण, स्मार्ट क्लासरूम, कंप्यूटर लैब, पेयजल, शौचालय और खेल सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।
स्कूलों की पेयरिंग से आया बदलाव
एक प्रमुख सुधार स्कूलों की पेयरिंग (विलय) है, जिसमें 50 से कम नामांकन वाले प्राथमिक स्कूलों को निकटवर्ती स्कूलों से जोड़ा जा रहा है। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग, शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है। सरकार का स्पष्ट रुख है कि कोई स्कूल बंद नहीं होगा, बल्कि इंटीग्रेटेड कैंपस बनाकर नर्सरी से 12वीं तक शिक्षा दी जाएगी।
2026 तक प्री-प्राइमरी/यूकेजी संचालित करने का लक्ष्य
वर्ष 2026 तक सभी प्राथमिक और कंपोजिट स्कूलों में बाल वाटिका-3 (प्री-प्राइमरी/यूकेजी) संचालित करने का लक्ष्य है, जिससे 3-6 वर्ष के बच्चों की आधारभूत शिक्षा मजबूत होगी।
500 से अधिक छात्रों वाले स्कूलों को मॉडल स्कूल बनाने पर जोर
वित्तीय वर्ष 2025-26 के कुल बजट ₹8.08 लाख करोड़ में शिक्षा को 13 परसेंट हिस्सा दिया गया है, यानी लगभग ₹1.06 लाख करोड़। इसमें प्राथमिक/उच्च प्राथमिक स्कूलों के उन्नयन के लिए ₹2,000 करोड़ अलग से आवंटित किए गए हैं। इससे 500 से अधिक छात्रों वाले स्कूलों को मॉडल स्कूल बनाने, भवन निर्माण, स्मार्ट क्लास और अन्य सुविधाओं पर जोर है। शिक्षा विभाग में डिजिटल इंडिया ई-गवर्नेंस और छात्रवृत्ति योजनाओं पर भी फोकस है।