
Operation Mahadev: 22 अप्रैल को पहलगाम के बैसरन मैदान में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। अब भारतीय सेना ने उसी हमले के मास्टरमाइंड हाशिम मूसा और उसके दो साथियों को 'ऑपरेशन महादेव' के तहत मार गिराया है। यह ऑपरेशन जितना साहसी था, उतना ही तकनीकी रूप से भी मजबूत रहा। दुर्गम महादेव पीक पर आतंकी ठिकाने तक पहुंचना आसान नहीं था, लेकिन भारतीय खुफिया एजेंसियों और सेना की संयुक्त रणनीति ने यह असंभव काम भी संभव कर दिखाया।
चाइनीज रेडियो से मिली सटीक जानकारी
खुफिया एजेंसियों को सुराग मिला था कि दाचीगाम नेशनल पार्क के पास चीन में निर्मित Ultra High Frequency Radio उपकरण का उपयोग किया जा रहा है। यह उपकरण पाकिस्तान समर्थित आतंकियों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है और इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे ट्रैक करना बेहद मुश्किल होता है। लेकिन इस बार यही डिवाइस आतंकियों की कमजोरी बन गया। मूसा ने रविवार रात 2 बजे इस रेडियो से पाकिस्तान में अपने आकाओं से संपर्क किया, जिससे उसकी सटीक लोकेशन मिल गई।
महादेव पीक तक 16 किमी पैदल पहुंची सेना
महादेव पीक एक अत्यंत दुर्गम क्षेत्र है, जहां तक पहुंचने के लिए 16 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। सेना ने लोकेशन की पुष्टि के बाद सभी रास्तों को ब्लॉक कर दिया और किसी भी प्रकार की जानकारी लीक न हो, इसके लिए पूरी कार्रवाई गोपनीय रखी गई। सुरक्षाबलों की सटीक रणनीति के कारण घाटी में मौजूद आतंकी नेटवर्क भी कोई मदद नहीं कर सका।
ऑपरेशन महादेव में मारे गए तीन आतंकी
इस संयुक्त अभियान में भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ शामिल थे। तीनों एजेंसियों ने मिलकर लिडवास क्षेत्र में आतंकियों को घेरा और मुठभेड़ के दौरान तीनों को मार गिराया। हाशिम मूसा के ठिकाने से मिले सामान से पता चला कि उन्हें नजदीकी गांवों से रसद मिल रही थी। अब सुरक्षाबल उनके लोकल सपोर्ट नेटवर्क पर भी छापेमारी कर रहे हैं।
पहलगाम अटैक का बदला
पहलगाम अटैक में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने धर्म पूछकर 26 टूरिस्ट की नृशंस हत्या की थी। इस हमले के बाद प्रधानमंत्री द्वारा सेना को मिली खुली छूट के बाद भारत ने Operation Sindoor चलाकर पाकिस्तान में कई आतंकी ठिकानों को तबाह किया था। ऑपरेशन महादेव उसी श्रृंखला का एक निर्णायक पड़ाव है, जिसने भारत के आतंक विरोधी संकल्प को फिर सिद्ध किया।