Operation mahadev भारतीय सेना के सफल ‘ऑपरेशन महादेव’ ने 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेते हुए लश्कर-ए-तैयबा के खूंखार आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया है। इस ऑपरेशन में मारा गया हाशिम मूसा उर्फ सुलेमान शाह, न सिर्फ हमले का मास्टरमाइंड था, बल्कि वह पाकिस्तानी सेना की स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG) यूनिट का पूर्व कमांडो भी था। भारत की इस कार्रवाई से पाकिस्तान तिलमिला गया है। वह मारे गए आतंकियों को मासूम नागरिक बताकर नया प्रोपेगैंडा खड़ा करने की कोशिश कर रहा है।
ऑपरेशन महादेव: 98 दिन बाद लिया गया बदला
22 अप्रैल को बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले में 26 सैलानियों की नृशंस हत्या की गई थी। इस हमले के मास्टरमाइंड सुलेमान शाह समेत दो और आतंकियों को भारतीय सेना ने श्रीनगर के बाहरी इलाके में घेरकर मार गिराया। मारे गए अन्य आतंकियों की पहचान जिब्रान और हमजा अफगानी के रूप में हुई है। सेना ने इन आतंकियों के पास से M4 कार्बाइन, दो AK राइफल समेत भारी मात्रा में हथियार बरामद किए हैं।
पाकिस्तान की झल्लाहट और बेहूदा दावे
भारतीय सेना की कार्रवाई से बौखलाए पाकिस्तान ने दावा किया है कि भारत ने 56 पाकिस्तानी नागरिकों को अवैध रूप से हिरासत में ले रखा है और उन्हें स्टेज्ड एनकाउंटर में मारकर आतंकवादी घोषित किया जा रहा है। पाकिस्तान इन आतंकियों को 'मासूम नागरिक' बताकर भारत पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगा रहा है।
सैटेलाइट फोन ने खोला आतंकियों का लोकेशन
सेना को उस वक्त बड़ी सफलता मिली जब पहलगाम हमले में इस्तेमाल किए गए सैटेलाइट फोन का दोबारा सिग्नल ट्रेस हुआ। इसके बाद तेजी से कार्रवाई करते हुए सेना ने ऑपरेशन महादेव लॉन्च किया और तीनों आतंकियों को घेर लिया।
दुनिया को गुमराह करने की कोशिश
पाकिस्तान न केवल अपनी आतंकवादी साजिशों को छिपा रहा है, बल्कि अब वह मारे गए आतंकियों को निर्दोष बताकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर सहानुभूति जुटाने का प्रयास कर रहा है। उसकी एजेंसियां और मीडिया अब इसे ‘फेक एनकाउंटर’ करार देने में जुटे हैं, जबकि आतंकियों के पास अत्याधुनिक हथियार और सैटेलाइट फोन बरामद होना उनके झूठ की पोल खोलता है।