दिल्ली में डिफेंस डायलॉग को भारतीय थल सेना प्रमुख (COAS) जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने संबोधित किया. इस दौरान सीओएएस जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने रक्षा क्षेत्र में हो रहे सुधारों पर प्रकाश डाला. इस दौरान उन्होंने कहा कि वर्तमान सुधारों के दौर में खरीद प्रक्रिया एक ‘गेम-चेंजर’ की तरह साबित हो रही है. इस महीने ही रक्षा खरीद मैनुअल (Defence Procurement Manual) जारी किया गया है, जबकि रक्षा अधिप्राप्ति प्रक्रिया (Defence Acquisition Procedure) तेज़ गति से आगे बढ़ रही है।
जनरल द्विवेदी द्वारा बताया गया है कि “दिसंबर तक इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा और अगले वित्तीय वर्ष से यह पूरी तरह लागू हो जाएगी. जो कि एक अत्यंत सकारात्मक संकेत है.”
आयात निर्भरता को एक ‘रैचेटिंग इफ़ेक्ट’ कहा
इसके साथ ही सेना प्रमुख ने आयात निर्भरता को एक ‘रैचेटिंग इफ़ेक्ट’ बताया, यानी एक तकनीक जो कि दूसरी तकनीक का मुकाबला करने के लिए ज़रूरी हो जाती है. इसको लेकर उन्होंने चिंता जताई कि जब तक अनुसंधान एवं विकास (R&D) आधार को व्यापक नहीं बनाया जाता, तब तक यह निर्भरता बनी रहेगी।
उदाहरण के तौर पर उन्होंने बताया कि“अगर हम फार्मास्यूटिकल्स में 1000 करोड़ खर्च करते हैं, तो वीज़ा (रक्षा तकनीक) पर मात्र 100 करोड़ खर्च करना उचित नहीं हैं. हमें इस असंतुलन की ओर ध्यान देना होगा.” इसके साथ ही उन्होंने ये भी स्वीकार किया कि अगले चार-पांच साल तक महत्वपूर्ण घटक आयात करने होंगे, जिसकी वजह से आयात निर्भरता बनी रहेगी.
साइबर और डेटा सुरक्षा एक बड़ी चुनौती
वहीं जनरल द्विवेदी ने साइबर और डेटा कमजोरी को एक ‘रेस्टिंग इफ़ेक्ट’ बताया जो कि सहयोगी कोशिशों में बाधा डालता है. उन्होंने कहा कि “यह हमें कई क्षेत्रों में सहयोग करने से रोकता है, क्योंकि हम साइलो में काम कर रहे हैं. यह एक बड़ी चुनौती बन गई है, लेकिन हम इसे खोलने की दिशा में काम कर रहे हैं.”
नई प्रक्रिया में इन बातों पर दिया गया विशेष ध्यान
‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत जनरल द्विवेदी का यह बयान रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने की सरकार की नीति से पूरी तरह मेल खाता है. जहां नई खरीद प्रक्रिया से न केवल प्रक्रिया तेज़ होगी, वहीं स्वदेशी उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा और आयात बिल में कमी आएगी. रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक नई प्रक्रिया में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने, तेज़ निर्णय प्रक्रिया और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया गया है. ये अहम कदम भारतीय सेना को आधुनिक, स्वदेशी और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है.
"सिंदूर 1.0 में हम सशक्त हुए और सबक सीखे"
इसके साथ ही सीओएएस जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा कि "सिंदूर 1.0 में ओपन सोर्स विश्लेषण और पूर्वानुमान विश्लेषण ने हमारी बहुत मदद की. देश के अंदर बहुत सारे स्वयंसेवक आगे आए, प्रवासी आगे आए और हमारी मदद की... जहां तक सिंदूर 1.0 का सवाल है, हम बहुत सशक्त हुए, हमने अपने सबक भी सीखे हैं. इसलिए, चाहे वह सिंदूर 2.0 हो या उसके बाद कोई और लड़ाई, हम इस पहल का लाभ उठाने के तरीके पर बड़े पैमाने पर विचार कर रहे हैं..."