Operation Sindoor Diplomacy: ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान का आतंकी चेहरा दुनिया के सामने लाने के लिए सरकार ने सांसदों का एक डेलीगेशन बनाया है. जिसमें सभी दलों के सांसदों को शामिल किया है. लेकिन ये डेलीगेशन सिर्फ 32 देशों में ही जाएंगे. साथ वहां जाकर पाकिस्तान की पोल खोलने का काम करेंगे. लेकिन इनती बड़ी दुनिया में सिर्फ 32 देशों को ही क्यों चुना गया.. आपको बता दें कि बुधवार से सांसदों की अलग-अलग टीमें दुनिया के अलग-अलग देशों का दौरा कर भारत के पक्ष से उनको अवगत कराएंगे.
कूटनीतिक ऑपरेशन शुरू
आज से यानि बुधवार से सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल 32 देशों और यूरोपीय संघ (EU) का दौरा करेंगे. इनका मकसद पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को स्पष्ट करना और वैश्विक समर्थन जुटाना है. विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने मंगलवार को तीन प्रतिनिधिमंडलों को इस मिशन के बारे में जानकारी दी. अब सवाल ये ही उठता है कि सिर्फ 32 देशों को ही क्यों चुना गया. आइये जानते हैं क्या इसके पीछे के मुख्य कारण?
क्यों चुने गए ये 33 देश?
विक्रम मिस्री के मुताबिक, इन 32 देशों का चयन सोच-समझकर किया गया है. क्योंकि इनमें 15 देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के स्थायी या अस्थायी सदस्य हैं. पांच अन्य देश जल्द ही UNSC के सदस्य बनने वाले हैं. बाकी देशों को इसलिए चुना गया, क्योंकि उनकी आवाज वैश्विक मंच पर वजन रखती है. ये देश भारत के आतंकवाद विरोधी रुख को समझने और समर्थन देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. इसलिए इन देशों में आतंकिस्तान का चेहरा बेनकाब होगा तो दुनिया में बात पहुंच जाएगी..