Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का जश्न देश का हर नागरिक मना रहा है. क्योंकि इस ऑपरेशन में 100 आतंकियों के साथ 40 पाक सेना के सैनिकों को भी मौत के घाट उतारने की पुष्टि हो गई है. पहलगाम में हुए आतंकी हमले में जिन 26 निर्दोश पर्यटकों ने अपनी जान गंवाई थी. इससी सच्ची श्रद्धांजलि उनके लिए दूसरी नहीं हो सकती. लेकिन इससे भी ज्यादा खुशी की बात ये सामने आ रही है कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता विदेशी नहीं बल्कि स्वदेशी हथियारों के दम पर हांसिल की गई है. मीडिया रिपोट्स के मुताबिक खुलासा हुआ है कि इस मिशन में स्वदेशी हथियार गेम चेंजर साबित हुए हैं..
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रक्षा सलाहकार के द्वारा एक प्रतिष्ठित मीडिया हाउस के दिये इंटरव्यू से बड़ा खुलासा हुआ है. जिसमें उन्होने बताया कि इस मिशन में 'स्वदेशी' हथियार सिस्टम जैसे ब्रह्मोस, आकाश और एंटी-ड्रोन सिस्टम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने कहा, ये "पहली बार है जब भारत में बने हाथियारों का इस्तेमाल हुआ है, इस पर गर्व है. पहली बार 'आकाश' का इस्तेमाल किया और इसने बेहद अच्छा काम किया. पाकिस्तान को इसने करारा जवाब दिया. हम सभी खुश हैं क्योंकि देश में बने इन हाथियारों ने इतना अच्छा काम किया,,.
आकाश' की खासियत
स्वदेशी रूप से विकसित 'आकाश' सिस्टम में सतह से हवा में वार करने वाली मध्यम दूरी की मिसाइल है. इस सिस्टम को डीआरडीओ ने डिजाइन किया है. इसकी रेंज 25 से 30 किलोमीटर की है.यह अपनी तैनाती के स्थान से 20 से 30 किलोमीटर तक की दूरी तक के टारगेट को नष्ट कर सकता है.यह 'रडार-बेस्ड कमांड गाइडेंस' के अंतर्गत दुश्मन के लक्ष्य पर बेहद सटीकता से हमला करता है.आकाश मिसाइल सिस्टम भारतीय थल सेना और वायु सेना दोनों के पास उपलब्ध है.
पाकिस्तान विदेशी हथियारों पर निर्भर
भारत ने इस मुकाबले में स्वदेशी हथियार प्रणालियों का उपयोग किया. वहीं, पाकिस्तान अपने अधिकांश विदेशों से आयातित हथियार प्रणालियों पर निर्भर है. विशेषज्ञों का मानना है कि विदेश से मिले इन हथियारों और विमानों की तकनीक संबंधी पूरी जानकारी भी पाकिस्तान के पास नहीं है. इन हथियारों के इस्तेमाल की समुचित ट्रेनिंग भी पाकिस्तानी सेना के पास नहीं है.