मॉनसून सत्र के पहले ही दिन संसद में विपक्ष के हंगामे के बाद सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के लिए हामी भर दी है. अब संसद के दोनों सदनों में कुल 25 घंटे इस मुद्दे पर बहस होगी. लोकसभा में 16 घंटे और राज्यसभा में 9 घंटे चर्चा के लिए तय किए गए हैं. सत्र की शुरुआत होते ही विपक्षी सांसदों ने ऑपरेशन सिंदूर, पहलगाम में हुए आतंकी हमले, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता की बात और बिहार में मतदाता सूची की जांच जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग की. इस दौरान उन्होंने जमकर नारेबाजी और विरोध किया.
बार-बार स्थगित हुई लोकसभा की कार्यवाही
हंगामे की वजह से लोकसभा की कार्यवाही पहले 12 बजे तक, फिर 2 बजे तक और बाद में 4 बजे तक स्थगित करनी पड़ी. इसके बाद भी स्थिति नहीं सुधरी. पीठासीन सभापति संध्या राय और जगदंबिका पाल ने विपक्ष से अपील की थी कि वो सदन को चलने दें, क्योंकि सरकार चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है.
दिवंगत लोगों को दी गई श्रद्धांजलि
सत्र की शुरुआत में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पहलगाम आतंकी हमले और अहमदाबाद विमान हादसे में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी. साथ ही हाल में आई प्राकृतिक आपदाओं में मारे गए लोगों का भी जिक्र किया गया और सदन में दो मिनट का मौन रखा गया.
रक्षा मंत्री ने क्या कहा?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार रक्षा से जुड़े हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है. उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि लोकसभा अध्यक्ष जो भी फैसला लेंगे, सरकार उसका पालन करेगी और पूरी गंभीरता से चर्चा में भाग लेगी.
राहुल गांधी का आरोप और सरकार की प्रतिक्रिया
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उन्हें संसद में बोलने नहीं दिया जा रहा. इस पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि संसद में बोलने का नियम संविधान के मुताबिक तय होता है और यह अधिकार पीठासीन अधिकारी के पास है. उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी को अब पहले जैसी विशेष सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, जिससे उन्हें दुख हो रहा है.
सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामे के बीच अब साफ हो गया है कि संसद में ऑपरेशन सिंदूर समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी. अगले हफ्ते संसद में इस पर खुलकर बहस की जाएगी जिससे जनता को इन मसलों पर सरकार और विपक्ष दोनों का नजरिया जानने का मौका मिलेगा.