ऑपरेशन सिंदूर की गूंज अब वैश्विक मंच तक पहुंच चुकी है। अमेरिका के हिंद-प्रशांत कमान के प्रमुख एडमिरल सैमुअल जे. पपारो ने नई दिल्ली दौरे के दौरान इस सैन्य अभियान की खुलकर सराहना की। उन्होंने भारतीय सेना के संयम, सटीक रणनीति और संतुलित कार्रवाई को शांति की मिसाल बताया। उनके बयान को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सामरिक समीकरणों और भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग के संदर्भ में बेहद अहम माना जा रहा है।
दिल्ली दौरे में ऑपरेशन सिंदूर की खुली प्रशंसा
Samuel J. Paparo ने 15 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में बातचीत के दौरान कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने पेशेवर सैन्य क्षमता और जिम्मेदार शक्ति-प्रयोग का उदाहरण पेश किया। उन्होंने विशेष रूप से भारतीय सेना के संयम और ‘टैक्टिकल एक्जीक्यूशन’ की सराहना की। उनके मुताबिक, ऐसे अभियानों में ताकत के साथ संतुलन दिखाना ही परिपक्व सैन्य नीति की पहचान है।
चीन-पाक हथियारों से मिले रणनीतिक सबक
एडमिरल पपारो ने बिना सीधे नाम लिए क्षेत्र में बढ़ती आक्रामकता और जबरदस्ती की नीति पर चिंता जताई। पाकिस्तान द्वारा चीनी मूल के मिसाइल और गाइडेंस सिस्टम के इस्तेमाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इससे लंबी दूरी के हथियारों और ‘किल चेन’ की जटिलता को समझने का मौका मिला। उनका संकेत साफ था कि हिंद-प्रशांत में शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए तकनीकी तैयारी और साझेदारी जरूरी है।
26 निर्दोषों के खून का जवाब: ऑपरेशन सिंदूर
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के Baisaran Valley में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई थी। इसके जवाब में 7 मई 2025 को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया। सेना, वायुसेना और नौसेना ने मिलकर पाकिस्तान और पीओके में 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। ब्रह्मोस मिसाइल, ड्रोन और एआई आधारित सिस्टम के जरिए सटीक हमले किए गए, जिनमें करीब 100 आतंकियों के मारे जाने का अनुमान है।
एयर सुपीरियरिटी और रणनीतिक बढ़त
चार दिनों तक चले अभियान ने भारत की एयर सुपीरियरिटी और तकनीकी बढ़त को दुनिया के सामने रखा। जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान की ओर से ड्रोन और सीमित हमलों की कोशिश हुई, लेकिन भारत ने नियंत्रण बनाए रखा। सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, इस अभियान ने भविष्य के संघर्षों में भारत की ‘डिटरेंस पॉलिसी’ को और मजबूत किया है।
हिंद-प्रशांत में मजबूत होती साझेदारी
एडमिरल पपारो ने कहा कि भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी का असर “एक्सपोनेंशियल डिटरेंस” के रूप में दिखता है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र, जहां दुनिया की 60% आबादी और अधिकांश आर्थिक गतिविधि केंद्रित है, वहां स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों देशों का सहयोग अहम है। समुद्री सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता और संप्रभुता के सिद्धांतों पर साझा प्रतिबद्धता भविष्य की रणनीतिक दिशा तय करेगी।
ऑपरेशन सिंदूर ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ सख्त, लेकिन संतुलित नीति पर आगे बढ़ रहा है। साथ ही, वैश्विक मंच पर उसकी सैन्य विश्वसनीयता और कूटनीतिक पकड़ दोनों मजबूत हुई हैं।