शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने छात्रों के विरोध-प्रदर्शन, संसद में विपक्ष के हंगामे, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट में अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (एक्यूआईएस) के कथित संबंध और महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा के नियम समेत कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस और विपक्ष पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि छात्रों के मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय सभी राज्यों में प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों की समस्याओं पर समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए।
समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया
संजय निरुपम ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन को लेकर विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाते हुए झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष केंद्र सरकार से छात्र आंदोलनों और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर लगातार सवाल पूछते हैं, लेकिन झारखंड में उनकी सरकार होने के बावजूद वहां प्रदर्शन कर रहे छात्रों की समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल
उन्होंने कहा कि झारखंड में छात्र पिछले कई सप्ताह से सड़क पर प्रदर्शन और आमरण अनशन कर रहे हैं। छात्रों से बातचीत करने के बजाय उन पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया जा रहा है। छात्र चाहे किसी भी वर्ग, क्षेत्र या सामाजिक पृष्ठभूमि से हों, उनके मुद्दों को समान रूप से देखा जाना चाहिए। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के मुद्दे इसलिए ज्यादा उठाए जा रहे हैं क्योंकि उनके प्रदर्शन को केंद्र सरकार के खिलाफ राजनीतिक अभियान के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। झारखंड के गरीब, आदिवासी, पिछड़े वर्ग और सामान्य वर्ग के छात्र भी छात्र ही हैं और उनकी समस्याओं को भी उतनी ही गंभीरता से उठाया जाना चाहिए।
सीबीआई जांच की मांग
संजय निरुपम ने झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी भर्तियों से जुड़े कथित विवादों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों की ओर से परीक्षा में गड़बड़ी, सरकारी नौकरियों में अनियमितता या भाई-भतीजावाद जैसे आरोप लगाए जा रहे हैं, तो सरकार को छात्रों के साथ बैठकर उनके सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने छात्रों की ओर से की जा रही सीबीआई जांच की मांग और झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर भी विचार करने की बात कही। कांग्रेस से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि यदि पार्टी वास्तव में छात्रों के हितों को लेकर गंभीर है तो उसे झारखंड में छात्रों के साथ बैठकर उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
लाल किले के पास हुए धमाके
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट में अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट के कथित संबंधों को नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके से जोड़े जाने के सवाल पर भी निरुपम ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट में एक्यूआईएस को अल-कायदा की भारतीय शाखा के तौर पर उल्लेखित किया गया है और रिपोर्ट में नवंबर 2025 में दिल्ली में हुए बड़े बम धमाकों से इसके कथित संबंध का निष्कर्ष सामने आया है।
पेशेवरों की आड़ में उग्रवादी गतिविधियों
निरुपम ने इसे आतंकवाद के बदलते स्वरूप का उदाहरण बताते हुए कहा कि अब आतंकवादी गतिविधियों के पीछे ऐसे लोग भी हो सकते हैं जो सामान्य पेशेवर और पढ़े-लिखे लोगों की तरह दिखाई देते हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग डॉक्टर या विश्वविद्यालयों से जुड़े पेशेवरों की आड़ में उग्रवादी गतिविधियों को अंजाम दे सकते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से एक्यूआईएस के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और संगठन से जुड़े नेटवर्क की पूरी तरह जांच कर उसके तार जहां-जहां तक जुड़े हों, वहां तक कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए ऐसे नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना जरूरी है।
सरकार की नीतियों की आलोचना
संसद में लगातार हो रहे हंगामे और कामकाज बाधित होने को लेकर भी संजय निरुपम ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संसद का सत्र विपक्ष और सभी सांसदों के लिए सरकार से सवाल पूछने और जनता के मुद्दे उठाने का महत्वपूर्ण अवसर होता है। विपक्ष के पास सरकार की नीतियों की आलोचना करने, सवाल पूछने और किसी गलती पर जवाब मांगने का पूरा अधिकार है। लेकिन संसद की कार्यवाही को लगातार बाधित करने से सरकार से ज्यादा नुकसान देश और आम जनता का होता है। संसद के कामकाज के दिनों की संख्या पहले की तुलना में कम हुई है। ऐसे में उपलब्ध समय का इस्तेमाल बहस और चर्चा के लिए किया जाना चाहिए, न कि लगातार हंगामा करके कार्यवाही रोकने के लिए।