संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च 2026 से शुरू हो गया है और पहले ही दिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इसी मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी है। जब उनसे पूछा गया कि इस प्रस्ताव पर सपा के 37 सांसद क्या रुख अपनाएंगे तो उन्होंने साफ कहा कि इस बारे में अंतिम फैसला फ्लोर लीडर्स की बैठक में लिया जाएगा। उनके मुताबिक सभी विपक्षी दल आपस में बातचीत करके आगे की रणनीति तय करेंगे।
विपक्ष की रणनीति पर टिकी नजरें
अखिलेश यादव ने कहा कि संसद के अंदर इस मुद्दे पर सभी दलों के नेताओं की बैठक होगी और उसी के बाद तय किया जाएगा कि आगे क्या कदम उठाया जाए। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की विदेश नीति कमजोर होती दिख रही है और महंगाई लगातार बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशों में फंसे कई भारतीय नागरिक त्योहार तक नहीं मना पाए और सरकार को इस दिशा में गंभीर कदम उठाने चाहिए। अखिलेश ने संकेत दिया कि विपक्ष इन मुद्दों को भी संसद में उठाने की तैयारी कर रहा है।
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प्रस्ताव पर ऐसे आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
लोकसभा की कार्यसूची के अनुसार स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव से जुड़े नोटिस पर सोमवार को सदन में विचार किया जाएगा। जब यह मुद्दा सदन में लाया जाएगा तब कम से कम 50 सांसदों को इस प्रस्ताव के समर्थन में खड़ा होना होगा। अगर 50 सदस्य समर्थन में खड़े हो जाते हैं तो प्रस्ताव को औपचारिक रूप से सदन के सामने चर्चा और मतदान के लिए रखा जाएगा। लेकिन अगर इतनी संख्या में सदस्य समर्थन में नहीं आते तो यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पाएगा।
सदन में संख्या बल सरकार के पक्ष में
इस मुद्दे को लेकर सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों ने अपने सांसदों को सदन में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं। कांग्रेस के मोहम्मद जावेद, के सुरेश और मल्लू रवि इस प्रस्ताव को सदन में पेश करने की अनुमति मांगेंगे। हालांकि लोकसभा में सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल होने के कारण राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रस्ताव पारित होना मुश्किल है। नियमों के मुताबिक चर्चा के दौरान ओम बिरला सदन में मौजूद रह सकते हैं और अपना पक्ष भी रख सकते हैं, लेकिन उस समय वह सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं करेंगे।