UP News: उत्तर प्रदेश विधानमंडल के शीतकालीन सत्र का मंगलवार को चौथा दिन था। सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई और प्रश्नोत्तर काल में परिषदीय स्कूलों से जुड़े मुद्दों ने जोर पकड़ा। विपक्षी सदस्यों ने शिक्षा की गिरती गुणवत्ता, स्कूल मर्जर नीति और शिक्षकों की भर्ती पर सरकार को घेरा, जबकि बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने आंकड़ों के साथ जवाब दिया। प्रश्नोत्तर काल की शुरुआत परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता पर सवालों से हुई। सपा विधायकों ने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी नहीं पढ़ाई जा रही, जिससे गरीब परिवार के बच्चे निजी स्कूलों की ओर भाग रहे हैं।
हर साल 12 हजार शिक्षक रिटायर हो रहे
विधायक ब्रजेश कटारिया ने कहा कि शिक्षकों को डाटा एंट्री ऑपरेटर बना दिया गया है। चुनाव ड्यूटी, एसआईआर (स्कूल इम्प्रूवमेंट रिपोर्ट), मिड-डे मील और अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में फंसाकर पढ़ाई से दूर कर दिया गया है। उन्होंने पूछा कि जब शिक्षक का फोकस दस्तावेजों पर होगा तो बच्चों की शिक्षा कैसे सुधरेगी?एक अन्य सपा विधायक ने दावा किया कि प्रदेश में 1.5 लाख शिक्षक पद खाली हैं। हर साल 12 हजार शिक्षक रिटायर हो रहे हैं, लेकिन छह वर्षों से कोई बड़ी भर्ती नहीं हुई। विधायक डॉ. रागिनी सोनकर ने भी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।
विपक्ष ने स्कूल मर्जर नीति को निशाना बनाया
विपक्ष ने स्कूल मर्जर नीति को भी निशाना बनाया, कहा कि कम नामांकन वाले स्कूलों को मर्ज करने से ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। जवाब में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने स्पष्ट किया कि कोई स्कूल बंद नहीं किया गया है। केवल एक किलोमीटर के दायरे में 50 से कम नामांकन वाले स्कूलों को मर्ज किया गया, जिससे बच्चों की संख्या बढ़ी और शिक्षकों की तैनाती भी अधिक हुई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) लागू होने के बाद मातृभाषा, स्थानीय भाषा और राष्ट्रभाषा पर जोर दिया जा रहा है, पहले अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई हो रही थी। मंत्री ने आश्वासन दिया कि शिक्षा गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार प्रयास चल रहे हैं, निपुण भारत मिशन और अन्य योजनाओं से बच्चों का स्तर बेहतर हो रहा है।
पदों की समीक्षा चल रही
शिक्षक भर्ती पर उन्होंने कहा कि पदों की समीक्षा चल रही है और जल्द कार्रवाई होगी। प्रश्नोत्तर काल के बाद सदन में विधायी कार्य शुरू हुए। अनुपूरक बजट पर शेष चर्चा, कैग रिपोर्ट पेश करने और कुछ विधेयकों पर विचार हुआ। विपक्ष ने कोडीन कफ सिरप मामले को फिर उठाने की कोशिश की, लेकिन अध्यक्ष ने नियमों का हवाला देकर आगे बढ़ाया। सपा विधायकों ने सदन के बाहर प्रदर्शन भी किया। सत्र में शिक्षा मुद्दों ने सत्ता-विपक्ष के बीच तीखी बहस छेड़ दी। सरकार ने दावा किया कि योगी राज में सरकारी स्कूलों की स्थिति पहले से बेहतर हुई है, जबकि विपक्ष ने इसे प्रचार बताया। सदन की कार्यवाही शाम तक चली और बुधवार को अनुपूरक बजट पर मतदान व विधेयकों की मंजूरी प्रस्तावित है।