Hindi in Tamil Nadu: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन ने भाषा शहीद दिवस के मौके पर हिंदी को लेकर अपना स्पष्ट और सख्त रुख दोहराया है। उन्होंने कहा कि राज्य में हिंदी के लिए पहले भी कोई स्थान नहीं था, आज भी नहीं है और भविष्य में भी नहीं होगा। स्टालिन का यह बयान केंद्र और राज्य के बीच भाषा नीति को लेकर चल रहे मतभेदों के बीच सामने आया है।
सोशल मीडिया पोस्ट में दोहराया पुराना स्टैंड
मुख्यमंत्री स्टालिन ने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि तमिलनाडु अपनी भाषाई पहचान से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने 1960 के दशक के हिंदी-विरोधी आंदोलन को याद करते हुए कहा कि उस दौर में लोगों ने अपनी मातृभाषा की रक्षा के लिए बलिदान दिया था और वही भावना आज भी जीवित है।
भाषा शहीदों को दी श्रद्धांजलि
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने चेन्नई में भाषा शहीद थलामुथु और नटरासन के स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही चेन्नई महानगर विकास प्राधिकरण भवन में उनकी प्रतिमाओं का अनावरण किया। स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु का आंदोलन केवल एक राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि इसने पूरे देश में भाषाई अधिकारों की बहस को मजबूत किया।
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क्या है भाषा शहीद दिवस का महत्व
भाषा शहीद दिवस उन युवाओं की याद में मनाया जाता है जिन्होंने 1964-65 के दौरान हिंदी को एकमात्र आधिकारिक भाषा बनाए जाने के विरोध में अपनी जान गंवाई थी। इसके बाद से ही तमिलनाडु में दो-भाषा नीति लागू है, जिसमें तमिल और अंग्रेजी को प्राथमिकता दी जाती है।
NEP 2020 को लेकर केंद्र से टकराव
द्रमुक सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लेकर भी केंद्र के खिलाफ मुखर है। मुख्यमंत्री का आरोप है कि इस नीति के जरिए हिंदी को गैर-हिंदी राज्यों पर परोक्ष रूप से लागू करने की कोशिश की जा रही है। स्टालिन ने कहा कि तमिल समाज अपनी भाषा को जीवन का हिस्सा मानता है और किसी भी दबाव का कड़ा विरोध करेगा।