पूर्वी दिल्ली के गीता कॉलोनी स्थित एसडीएम कार्यालय में तहसीलदार मनोज कुमार सिंह के साथ कथित मारपीट और गाली-गलौज का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। विरोध में दिल्ली के सभी तहसीलदारों ने कामकाज ठप कर हड़ताल शुरू कर दी और जिला मजिस्ट्रेट (ईस्ट) को ज्ञापन सौंपकर मामले में उचित कार्रवाई की मांग की। मामले में लक्ष्मी नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराए जाने की भी जानकारी सामने आई है। सरकारी कार्यालय में अधिकारी के साथ कथित मारपीट की घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था में अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विरोध प्रदर्शन के दौरान तहसीलदारों ने एकजुट होकर नारेबाजी की और स्पष्ट किया कि सरकारी ड्यूटी निभा रहे अधिकारियों के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
एकजुटता दिखाते हुए कामकाज बंद रखा
तहसीलदार मनोज कुमार सिंह के साथ कथित मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद राजस्व विभाग के अधिकारियों में नाराजगी बढ़ गई। घटना के विरोध में तहसीलदारों ने एकजुटता दिखाते हुए कामकाज बंद रखा। इससे राजस्व विभाग से जुड़े नियमित कार्य प्रभावित हुए। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी कार्यालय में काम कर रहे किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को भय और दबाव के माहौल में काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। विरोध प्रदर्शन के दौरान तहसीलदारों ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेने और संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग उठाई। उनका कहना है कि यदि सरकारी कार्यालयों में ही अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी, तो वे निष्पक्ष और निर्भीक होकर अपने दायित्वों का निर्वहन कैसे कर पाएंगे। तहसीलदारों के विरोध प्रदर्शन में संगठन के पदाधिकारियों ने घटना पर कड़ा ऐतराज जताया। तहसीलदारों ने कहा कि सरकारी कामकाज के दौरान किसी अधिकारी पर दबाव बनाने, गाली-गलौज करने या मारपीट करने जैसी घटनाओं को सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
सर्वाइविंग मेंबर प्रमाणपत्र के आवेदन से शुरू हुआ विवाद
मामले से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, विवाद सर्वाइविंग मेंबर सर्टिफिकेट यानी जीवित सदस्य प्रमाणपत्र के आवेदन को खारिज किए जाने के बाद शुरू हुआ था। संबंधित पक्ष की ओर से बताया गया कि आवेदन में दो बच्चों की जन्मतिथियों के बीच चार महीने का अंतर दर्ज था। इसी विसंगति के आधार पर आवेदन को लेकर आपत्ति उठी और उसे खारिज किए जाने के बाद विवाद बढ़ गया।
घटना के विरोध में तहसीलदारों ने जिला मजिस्ट्रेट (ईस्ट) को ज्ञापन सौंपकर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी प्रमुख मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट की जाए और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। लक्ष्मी नगर थाने में एफआईआर दर्ज होने की जानकारी के बाद अब मामले में पुलिस की जांच और प्रशासनिक स्तर पर होने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। एक ओर तहसीलदार अपनी सुरक्षा और सम्मान को लेकर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मामले की निष्पक्ष जांच के जरिए विवाद की पूरी सच्चाई सामने लाना जरूरी है।