बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के ग्वादर जिले में कई सैन्य ठिकानों पर हमलों के दौरान 80 से अधिक पाकिस्तानी सैन्य और खुफिया कर्मियों को मारने का दावा किया है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों में फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गनाइजेशन (एफडब्ल्यूओ) के एक शिविर और अन्य सैन्य एवं पुलिस प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया।
एसएसजी के जवान शामिल
बीएलएफ के प्रवक्ता मेजर ग्वाहराम बलूच ने एक बयान में कहा कि संगठन के 'ऑपरेशन अलमास' के दौरान मारे गए लोगों में मिलिट्री इंटेलिजेंस (एमआई) का एक कैप्टन, इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के अधिकारी और स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (एसएसजी) के जवान शामिल हैं। उन्होंने दर्जनों अन्य कर्मियों के गंभीर रूप से घायल होने का भी दावा किया। 'द बलूचिस्तान पोस्ट' ने यह रिपोर्ट दी है।
अभियान 22 अक्टूबर को शुरू
ग्वाहराम बलूच के अनुसार, यह अभियान 22 अक्टूबर को शुरू हुआ था। इस दौरान संगठन ने एफडब्ल्यूओ शिविर के प्रवेश द्वार पर विस्फोटकों से भरे वाहन से आत्मघाती हमला किया। उनके दावे के मुताबिक, विस्फोट में मुख्य द्वार और आसपास के ठिकाने नष्ट हो गए, जिससे अन्य लड़ाकों को परिसर में प्रवेश करने का मौका मिला।
एक आवासीय बैरक को निशाना बनाया
प्रवक्ता ने दावा किया कि एफडब्ल्यूओ परिसर में दाखिल होने के बाद लड़ाकों ने आईएसआई के एक कार्यालय पर धावा बोला, जहां एक अधिकारी और पांच अन्य कर्मियों की मौत हो गई। एक अन्य कार्यालय में हुई अलग मुठभेड़ में मिलिट्री इंटेलिजेंस के छह कर्मी मारे गए, जिनमें एक कैप्टन भी शामिल था। बयान के अनुसार, इसके बाद लड़ाकों ने कई मंजिलों वाली एक आवासीय बैरक को निशाना बनाया और इमारत के अंदर मोर्चा संभाल लिया। ग्वाहराम बलूच ने दावा किया कि बैरक में हुई लड़ाई के दौरान कुल 21 कर्मी मारे गए। उन्होंने कहा कि परिसर पर दोबारा नियंत्रण हासिल करने की कोशिश में पाकिस्तानी बलों ने रातभर नौ और मुठभेड़ों का सामना किया। इसके बाद मोर्टार और तोपों से गोलाबारी की गई।