
Oversleeping Effects: अच्छी नींद सेहत के लिए जरूरी मानी जाती है, लेकिन जरूरत से ज्यादा नींद अब खतरे की घंटी मानी जा रही है. University of Oklahoma की ताजा रिसर्च में सामने आया है कि जो लोग रोजाना 9 घंटे से अधिक सोते हैं, उनमें समय से पहले मौत का खतरा 34% तक बढ़ सकता है. यह स्टडी 79 पुराने शोधों पर आधारित थी, जिनमें लाखों लोगों की नींद की आदतों और उनके स्वास्थ्य का विश्लेषण किया गया. इसके मुताबिक, 7 से 8 घंटे की नींद सबसे सुरक्षित मानी गई, जबकि इससे कम या ज्यादा सोना स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है.
ज्यादा नींद गंभीर बीमारियों की ओर इशारा
अध्ययन में यह भी पाया गया कि लंबे समय तक अधिक सोने वाले लोगों में कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याएं देखी गईं, जैसे कि डिप्रेशन, क्रॉनिक थकान, वजन बढ़ना, मेटाबॉलिक गड़बड़ी और एकाग्रता में कमी. विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा नींद खुद बीमारी नहीं है, बल्कि यह किसी गंभीर बीमारी का लक्षण हो सकता है. अगर व्यक्ति बिना कारण के रोज 9 घंटे से ज्यादा सोता है और फिर भी थका हुआ महसूस करता है, तो यह शरीर की चेतावनी हो सकती है.
कम नींद भी बन सकती है हार्ट अटैक की वजह
केवल ज्यादा नींद ही नहीं, बल्कि कम नींद लेना भी दिल की सेहत पर बुरा असर डालता है. रिसर्च में पाया गया कि जो लोग रोज 6 घंटे से कम सोते हैं, उनमें दिल की बीमारियों और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए स्वस्थ जीवन के लिए रोजाना 7 से 8 घंटे की गहरी और गुणवत्ता वाली नींद लेना जरूरी है.
कब लें डॉक्टर से सलाह
अगर आपकी नींद की अवधि अचानक बढ़ जाती है या आप नींद पूरी करने के बाद भी थका हुआ महसूस करते हैं, तो यह थायरॉइड, स्लीप एपनिया, या डिप्रेशन जैसी समस्याओं का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी है.
हर उम्र के लिए अलग है नींद की जरूरत
टीनेजर्स को 8-10 घंटे, जबकि वयस्कों को 7-9 घंटे की नींद पर्याप्त होती है. लेकिन नींद की मात्रा के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता और नियमितता भी बेहद जरूरी है, ताकि शरीर और दिमाग दोनों ताजगी से भरे रहें.