Owaisi Questions Varanasi Controversy: असदुद्दीन ओवेसी ने वाराणसी में नाव पर रोजा खोलने के मामले को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति नदी में नाव पर बैठकर खाना खाता है, तो इससे किसी की धार्मिक भावनाएं कैसे आहत हो सकती हैं। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने इसे एकतरफा कार्रवाई बताया और निष्पक्षता की मांग की।
गिरफ्तारी पर उठाए सवाल
ओवैसी ने 14 मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी की आलोचना करते हुए कहा कि उनका ‘गुनाह’ सिर्फ इतना है कि वे रोजा खोल रहे थे। उन्होंने तंज करते हुए पूछा कि क्या गंगा में गंदगी या सीवेज गिराने से किसी की धार्मिक भावनाएं आहत नहीं होतीं, लेकिन रोजा खोलने से हो जाती हैं। उन्होंने इस पूरे मामले को धार्मिक आधार पर भेदभाव का उदाहरण बताया।
सामाजिक माहौल पर टिप्पणी
रमजान के दौरान शराब की दुकानों के खुले रहने का मुद्दा उठाते हुए ओवैसी ने कहा कि अगर धार्मिक भावनाओं की बात की जाती है, तो सभी धर्मों के प्रति समान संवेदनशीलता होनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या इससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत नहीं होतीं। साथ ही उन्होंने समाज में बढ़ती कटुता और ध्रुवीकरण को लेकर चिंता जताई।
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युवाओं और सामाजिक मुद्दों पर फोकस
ओवैसी ने देश के युवाओं, खासकर हिंदू युवाओं से अपील करते हुए कहा कि उन्हें असली मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने बेरोजगारी का जिक्र करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में शिक्षित युवा नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उनका ध्यान भटकाया जा रहा है। उन्होंने समाज में नफरत की राजनीति पर भी सवाल उठाए।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी दिया बयान
इसके अलावा डोनाल्ड और Benjamin Netanyahu का नाम लेते हुए ओवैसी ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ईरान पर हमले क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ा सकते हैं और इसका असर व्यापक हो सकता है। साथ ही उन्होंने शांति की अपील करते हुए कहा कि संघर्ष का समाधान बातचीत से ही संभव है।