UP Assembly Elections: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन औवेसी रविवार को बहराइच के मटेरा में जनसभा कर चुनावी अभियान का आगाज करेंगे। राजनीतिक जानकार इस रैली को यूपी की सियासत में एआईएमआईएम की बड़ी रणनीतिक शुरुआत मान रहे हैं। पार्टी की नजर खासतौर पर मुस्लिम, यादव, पिछड़े और दलित वोटों पर है, जिन्हें समाजवादी पार्टी का पारंपरिक समर्थन आधार माना जाता है।
मटेरा से चुनावी संदेश देने की तैयारी
बहराइच की मटेरा विधानसभा सीट कोएआईएमआईएम ने सोच-समझकर चुना है। यह इलाका मुस्लिम और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं की बड़ी आबादी वाला क्षेत्र माना जाता है। पिछले कई चुनावों से यहां समाजवादी पार्टी का प्रभाव रहा है। एआईएमआईएम का मानना है कि अगर इस क्षेत्र में मजबूत पकड़ बनाई गई तो पार्टी को प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी राजनीतिक विस्तार का मौका मिलेगा।
200 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा
पार्टी के प्रदेश नेतृत्व का कहना है कि एआईएमआईएम 2027 में करीब 200 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है। साथ ही बहुजन समाज पार्टी के साथ संभावित गठबंधन की संभावनाओं पर भी चर्चा जारी है। पार्टी का मानना है कि मुस्लिम और दलित वोटों का समीकरण कई सीटों पर चुनावी तस्वीर बदल सकता है।
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सपा ने बताया वोट बांटने की कोशिश
समाजवादी पार्टी ने एआईएमआईएम की रणनीति पर सवाल उठाए हैं। सपा नेताओं का कहना है कि प्रदेश का मुस्लिम मतदाता राजनीतिक रूप से जागरूक है और वह वोटों के बंटवारे की राजनीति को समझता है। उनका दावा है कि पिछले चुनावों में एआईएमआईएम को जनता का समर्थन नहीं मिला और पार्टी एक भी सीट जीतने में सफल नहीं रही।
स्थायी आधार बनाने की कोशिश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एआईएमआईएम का तत्काल लक्ष्य सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में अपना स्थायी राजनीतिक आधार तैयार करना है। यदि पार्टी कुछ प्रतिशत वोट शेयर बढ़ाने में सफल रहती है, तो कई सीटों पर मुकाबले के समीकरण बदल सकते हैं। ऐसे में 2027 का चुनाव खासकर समाजवादी पार्टी के लिए नई चुनौती लेकर आ सकता है।