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NEET UG question paper Case: नीट यूजी परीक्षा में कुछ उम्मीदवारों ने क्वेश्चन पेपर के क्रम में गड़बड़ी को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए NEET-UG 2025 परीक्षार्थी के आंसरशीट्स को मैन्युअली चेक करने का निर्देश दिया है। बता दें कि अभ्यर्थी ने आरोप लगाया था कि उसके प्रश्नपत्र के गलत क्रम के कारण उसके अंक और रैंक में कमी आई।
क्या थी गड़बड़ी
बता दें कि स्टूडेंट्स का एक ग्रुप नीट एग्जाम के क्वेश्चन पेपर में गलत क्रम को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि उन्हें जो क्वेश्चन पेपर दिया गया उसमें सवाल का क्रम गलता था। सवालों का क्रम 1 से 180 तक होना चाहिए था, लेकिन यह 1 से 27 प्रश्न, फिर 54 से 81 तक, 28 से 53 तक, 118 से 151 तक, 82 से 117 और फिर 152 से 180 के क्रम में थे।
ओएमआर का मिलान नहीं हो पाया
याचिका में यह भी दावा किया है कि चूंकि उक्त प्रश्वपत्र के साथ अटैच ओएमआर शीट 1 से 180 तक बढ़ते क्रम में थी। इसी वजह से प्रश्नपत्र और ओएमआर का मिलान नहीं हो पाया, उसने संबंधित एग्जाम हॉल के पर्यवेक्षकों से प्रश्नपत्र की एक और कॉपी मांगी थी, लेकिन उसे देने से मना कर दिया गया था।
पेजों को गलत ढंग से स्टेपल किया गया
प्रतिवादियों की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने प्रश्नपत्र की एक प्रति रिकार्ड में पेश करके स्पष्ट किया कि यह गलती गलत स्टेपलिंग के कारण हुई। पेजों को गलत ढंग से स्टेपल किया हुआ था, जिससे वे क्रम में नहीं थे। पीठ ने कहा हालांकि अपनी संतुष्टि के लिए हम निर्देश देते हैं कि याचिकाकर्ता के पेपर का मैन्युअल चेक किया जाए और चेकिंग के परिणाम को रिकॉर्ड में रखा जाए, यह कार्य एक सप्ताह की अवधि के अंदर किया जाए।
12 अगस्त को होगीअगली सुनवाई
जस्टिस नागरत्ना ने निर्देश दिया कि यह एक गलती हो सकती है, लेकिन फिर भी उम्मीदवारों की संतुष्टि के लिए आंसरशीट्स का मूल्यांकन मैन्युअली होना चाहिए और मूल्यांकन के परिणाम को रिकॉर्ड पर रखा जाए। यह एक सप्ताह के अंदर होना चाहिए। अगली सुनवाई 12 अगस्त 2025 को होगी।