
भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तबाह हुए आतंकियों के ठिकानों को एक बार सक्रिय करने को लेकर पाकिस्तान ने पूरी ताकत लगा दी है। उसका लक्ष्य जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन को आगे लाना है। तीनों आतंकी समूहों को बेहतर ट्रेनिंग देने के लिए पाकिस्तानी सेना को जिम्मेदारी दी गई है।
अधिकारियों को तैनात करने का निर्णय लिया
जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन के नए सदस्यों को ट्रेनिंग देने के लिए पाकिस्तानी सेना ने अपने अधिकारियों को तैनात करने का निर्णय लिया है। इससे पहले पाकिस्तानी सेना की ओर से प्रशिक्षित कमांडर ही आतंकी शिविरों के संचालन की देखरेख करते थे। अब इन आतंकी समूहों के सभी प्रशिक्षण शिविरों की अगुवाई एक मेजर रैंक का अधिकारी करेगा। इसके साथ सभी शिविरों को पाकिस्तानी सेना की ओर ये सुरक्षा भी मुहैया कराई जाएगी।
आईएसआई तकनीकी सहायता तय कर रही
इन शिविरों के साथ इनके हर ऑपरेशन पर पाकिस्तानी सेना की निगरानी होने वाली है। इसके अलावा पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई तकनीकी सहायता तय कर रही है। इन सभी आतंकी शिविरों में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाने वाला है। आईएसआई यह तय कर रहा है कि नए शिविर पारंपरिक हथियारों की बजाय उच्च तकनीक वाले आधुनिक हथियारों से लैस हों। आईएसआई इन आतंकी समूहों को उच्च तकनीक वाली ड्रोन तकनीक से लैस कर रही है।