पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से कराची में औरत मार्च पर पाबंदियां लगाए जाने के बावजूद, सैकड़ों लोग सी-व्यू पर इकट्ठा हुए। इस दौरान उन मुद्दों पर आवाज उठाई गई जो आज भी देश की अनगिनत महिलाओं को प्रभावित करते हैं। वर्षों से औरत मार्च पाकिस्तान में महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक न्याय पर चर्चा का एक बड़ा और अहम मंच बन चुका है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सबसे भावुक पलों में से एक था शांति लियारी को श्रद्धांजलि दी गई। शांति लियारी की 19 साल की दुल्हन थी, जिसकी कथित यौन हिंसा के बाद हुई दुखद मौत ने वैवाहिक हिंसा और उस पर छाई चुप्पी जैसे कठिन लेकिन जरूरी मुद्दों पर फिर से बहस छेड़ दी। ऐसे आयोजनों की अहमियत इस बात में है कि वे समाज को उन विषयों पर खुलकर बात करने की जगह देते हैं, जिन पर आमतौर पर लोग चर्चा करने से कतराते हैं। पाकिस्तान का संविधान अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण तरीके से एक जगह इकट्ठा होने का अधिकार देता है। ये अधिकार सिर्फ किसी एक वर्ग के लिए नहीं हैं, बल्कि हर नागरिक के लिए हैं, चाहे उसकी राय लोकप्रिय हो या विवादित।
स्वयंसेवकों को हिरासत में लेने पर निंदा
पाकिस्तानी अधिकारियों की जिम्मेदारी हर सार्वजनिक सभा के संदेश का समर्थन करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि लोग सुरक्षित और जिम्मेदारी से अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल कर सकें।
छह मई को, ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (एचआरसीपी) ने कराची प्रेस क्लब के बाहर औरत मार्च की आयोजकों और स्वयंसेवकों को हिरासत में लेने की निंदा की। वहां वे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए इकट्ठा हुए थे।
एक्टिविस्ट और कलाकार शीमा किरमानी भी शामिल
पाकिस्तान के प्रमुख समाचार नेटवर्क जियो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकार संगठन ने कहा कि लोगों को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से रोकना शासन के बढ़ते दमनकारी रवैये को दिखाता है, जहां असहमति को लोकतंत्र की जरूरत मानने के बजाय खतरे की तरह देखा जाता है। एचआरसीपी का बयान उस घटना के बाद आया, जब पुलिस ने कराची प्रेस क्लब के बाहर औरत मार्च की कई नेताओं को थोड़ी देर के लिए गिरफ्तार कर लिया। इनमें एक्टिविस्ट और कलाकार शीमा किरमानी भी शामिल थीं।
एचआरसीपी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, हम कराची प्रेस क्लब के बाहर औरत मार्च के कई आयोजकों और स्वयंसेवकों की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करते हैं। वे वहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने वाले थे। यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि नागरिकों को अपने अधिकारों की बात रखने के लिए सार्वजनिक जगहों से व्यवस्थित तरीके से दूर रखने का हिस्सा है।