पाकिस्तान की पुलिस ने इस्लामाबाद में अफगान शरणार्थियों की गिरफ्तारी तेज कर दी है और निर्वासन अभियान के तहत दर्जनों लोगों को, जिनमें एक पत्रकार भी शामिल है, अस्थायी शिविरों में भेज दिया गया है। स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी। पाकिस्तानी पुलिस अफगान शरणार्थियों और शरण मांगने वालों को गिरफ्तार कर जबरन देश से बाहर भेज रही है, जिससे पहले से विस्थापित समुदायों पर दबाव और बढ़ गया है।
व्यवहार को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई
रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को पुलिस ने इस्लामाबाद के बी-17 इलाके से कई अफगान शरणार्थियों को हिरासत में लिया और उन्हें हाजी कैंप नामक अस्थायी शिविर में स्थानांतरित कर दिया। गिरफ्तार किए गए लोगों में एक पत्रकार भी शामिल है, जिससे पाकिस्तान में प्रेस स्वतंत्रता और मीडिया कर्मियों के साथ व्यवहार को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।
मनमाने छापों के आरोप लगाए
इससे पहले भी अफगान शरणार्थियों ने पाकिस्तानी पुलिस पर उत्पीड़न, जबरन वसूली और मनमाने छापों के आरोप लगाए हैं। खासकर फैसल टाउन जैसे इलाकों में पुलिसकर्मियों की ओर से चौबीसों घंटे अभियान चलाए गए, जिनमें कई बार वे सिविल कपड़ों में नजर आए।
कई लोग वर्षों से पाकिस्तान में रह रहे
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की कार्रवाइयों से शरणार्थियों में डर का माहौल बन गया है। इनमें से कई लोग वर्षों से पाकिस्तान में रह रहे हैं और उनके पास कोई कानूनी सुरक्षा नहीं है। मानवाधिकार संगठनों ने बार-बार पाकिस्तान से कानूनी प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी दायित्वों का पालन करने की अपील की है। उनका कहना है कि जबरन निर्वासन अफगान शरणार्थियों को गंभीर खतरों के सामने ला सकता है।
अवैध यातनाओं से बचाने की अपील
पिछले सप्ताह प्रमुख मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तानी सरकार से अपने देश में रह रहे अफगान शरणार्थियों को उत्पीड़न और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से अवैध यातनाओं से बचाने की अपील की थी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को लिखे एक खुले पत्र में संगठन ने वहां रह रहे अफगान शरणार्थियों की अवैध हिरासत, उत्पीड़न और निर्वासन पर गहरी चिंता जताई और कहा कि वे बेहद संवेदनशील स्थिति में हैं तथा राज्य संरक्षण के हकदार हैं।