काबुल और इस्लामाबाद के बीच तनाव अब खुली सैन्य टकराव की शक्ल लेता दिख रहा है। Islamic Emirate of Afghanistan के रक्षा मंत्रालय ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर ड्रोन स्ट्राइक का वीडियो जारी कर बड़ा दावा किया है। फुटेज में धमाकों, आग और धुएं के गुबार दिखाई दे रहे हैं। इन हमलों को पाकिस्तान की हालिया एयर स्ट्राइक के जवाब के तौर पर पेश किया जा रहा है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
सटीक ड्रोन हमलों का दावा
तालिबान-नेतृत्व वाले रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे अफगान वायु इकाइयों ने पाकिस्तान के कई अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। जारी वीडियो में कथित तौर पर सुसाइड ड्रोन के जरिए टारगेट पर सीधे प्रहार होते दिखाई दे रहे हैं। मंत्रालय ने इसे “सटीक और सफल ऑपरेशन” करार दिया है। दावा किया गया है कि हमलों में कमांड सेंटर और सैन्य सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि स्वतंत्र रूप से इन दावों की पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।
किन ठिकानों को बनाया गया निशाना?
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस्लामाबाद के पास फैजाबाद क्षेत्र में एक सैन्य कैंप, नौशेरा का मुख्यालय, जमरूद की सैन्य टाउनशिप और एबटाबाद स्थित सैन्य परिसर को टारगेट किया गया। एबटाबाद वही शहर है, जहां अतीत में वैश्विक स्तर पर चर्चित सैन्य ऑपरेशन हुए थे।
वीडियो में कई स्थानों पर विस्फोट के बाद उठता घना धुआं और आग की लपटें देखी जा सकती हैं, जिससे हमलों की तीव्रता का अंदाजा लगाया जा रहा है।
पाकिस्तान का जवाब और ‘ओपन वॉर’ की स्थिति
इससे पहले पाकिस्तान ने अफगान शहरों—काबुल, कंधार और पक्तिया—में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए थे। इस कार्रवाई को पाकिस्तान ने “ऑपरेशन राइटियस फ्यूरी” नाम दिया। पाकिस्तानी पक्ष का दावा है कि उसने 22 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया और बड़ी संख्या में तालिबान लड़ाकों को मार गिराया। अब दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है और स्थिति ‘ओपन वॉर’ जैसी बताई जा रही है, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहराता संकट
दक्षिण एशिया में पहले से मौजूद सुरक्षा चुनौतियों के बीच यह टकराव नए खतरे पैदा कर सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि कूटनीतिक प्रयास जल्द शुरू नहीं हुए, तो सीमावर्ती इलाकों में हिंसा और बढ़ सकती है। ड्रोन तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने युद्ध की प्रकृति बदल दी है, जहां बिना पारंपरिक जमीनी लड़ाई के भी भारी नुकसान संभव है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका और दोनों देशों की रणनीति पर सबकी नजर रहेगी।