Air India Financial Loss : पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर रखा है, जिसका सबसे बड़ा असर एयर इंडिया की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पड़ रहा है। यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाले विमानों को अब लंबा रास्ता अपनाना पड़ता है। इससे ईंधन की खपत, उड़ान का समय और संचालन का खर्च बढ़ गया है। एयर इंडिया के पूर्व CEO कैम्पबेल विल्सन ने अनुमान लगाया था कि यह पाबंदी लंबे समय तक जारी रहने पर कंपनी को सालाना करीब 5,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।
पाबंदी के पीछे क्या है वजह?
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया था। इसके दो दिन बाद 24 अप्रैल को पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया। भारत ने भी पाकिस्तानी विमानों के लिए ऐसी ही पाबंदी लगा दी। पाकिस्तान ने यह प्रतिबंध बढ़ाकर 24 नवंबर 2026 तक कर दिया है। इसका असर भारत से यूरोप और अमेरिका जाने वाली उड़ानों पर पड़ा है।
लंबे रास्ते ने कैसे बढ़ाया खर्च?
एयरस्पेस बंद होने के कारण भारतीय विमानों को अब पाकिस्तान के ऊपर से गुजरने के बजाय वैकल्पिक रास्ते अपनाने पड़ते हैं। इससे ईंधन की खपत बढ़ती है और विमान को ज्यादा समय तक हवा में रहना पड़ता है। क्रू ड्यूटी, विमान के इस्तेमाल और अन्य संचालन खर्च भी बढ़ जाते हैं। कुछ उड़ानों में अतिरिक्त ईंधन भरने के लिए बीच में रुकना पड़ सकता है। Business Standard की सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली-शिकागो उड़ान का रास्ता करीब 12,500 किलोमीटर से बढ़कर 15,000 किलोमीटर हो गया।
ये भी पढ़ें : Trump को चुनावी झटका, एशियाई बाजारों में हाहाकार; भारतीय निवेशकों की दौलत ₹5.83 लाख करोड़ बढ़ी
पांच हजार करोड़ का अनुमान कैसे?
पूर्व CEO कैम्पबेल विल्सन के मुताबिक, एयरस्पेस बंद होने से होने वाले नुकसान का आकलन सरकार ने एयरलाइंस से मांगा था। एयर इंडिया ने करीब 5,000 करोड़ रुपये का अनुमान दिया था। अक्टूबर 2025 में विल्सन ने बताया था कि उस समय तक कंपनी पर लगभग 4,000 करोड़ रुपये का वित्तीय असर पड़ चुका था। इसके अलावा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौ एयरपोर्ट पर परिचालन प्रभावित हुआ था। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, करीब 1,000 उड़ानें रद्द हुईं और 70 से 75 हजार यात्रियों को परेशानी हुई।
विदेशी एयरलाइंस को कैसे मिल रहा फायदा?
पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए एयरस्पेस बंद किया है, विदेशी विमानों के लिए नहीं। इसलिए ब्रिटिश एयरवेज, लुफ्थांसा, कतर एयरवेज और एमिरेट्स जैसी कंपनियां कई रूट पर पाकिस्तानी हवाई रास्ते का इस्तेमाल कर सकती हैं। इससे उन्हें समय और ईंधन बचाने में मदद मिलती है। दूसरी तरफ, मिडिल ईस्ट का तनाव और महंगा एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) एयर इंडिया की मुश्किलें और बढ़ा रहे हैं। जब तक पाबंदी जारी रहेगी, कंपनी को लंबे रूट और अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ सकता है।