मानवाधिकारों की निगरानी करने वाले संगठन जेनोसाइड वॉच ने पाकिस्तान में बढ़ते मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर नरसंहार (जेनोसाइड) निगरानी की चेतावनी जारी की है। संगठन ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान वर्तमान में नरसंहार के तीसरे चरण "भेदभाव" (डिस्क्रिमिनेशन) की स्थिति में है।
अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव
रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं और धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव समाज में गहराई तक जड़ें जमा चुका है और उनके विरुद्ध हिंसा व्यापक रूप से देखी जा रही है। संगठन ने पाकिस्तान को नरसंहार के तीसरे चरण (भेदभाव) और पांचवें चरण (संगठन) की श्रेणी में रखा है।
लैंगिक और राजनीतिक आधार पर बढ़ते विभाजन
रिपोर्ट में कहा गया है कि धार्मिक, लैंगिक और राजनीतिक आधार पर बढ़ते विभाजन, प्रतिबंधात्मक कानून, सेंसरशिप और कमजोर सुरक्षा व्यवस्थाएं देश को छठे चरण "ध्रुवीकरण" (पोलराइजेशन) की ओर ले जा रही हैं। वहीं, कमजोर और संवेदनशील समुदायों के खिलाफ हिंसा, उत्पीड़न और विस्थापन जैसी घटनाएं नौवें चरण "उत्पीड़न" (परसिक्यूशन) के संकेत भी दर्शाती हैं।
अमेरिकी मीडिया संस्थान पीजे मीडिया में लिखते हुए तुर्की मूल की पत्रकार उज़ाय बुलुत ने कहा कि ये चरण उन परिस्थितियों को दर्शाते हैं जो किसी राष्ट्रीय, जातीय, नस्लीय या धार्मिक समूह के सुनियोजित विनाश का माहौल तैयार कर सकती हैं।
महिलाएं और समलैंगिक समुदाय शामिल हैं
रिपोर्ट के मुताबिक, भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करने वाले प्रमुख समूहों में ईसाई, हिंदू, बौद्ध, शिया और अहमदिया समुदाय सहित धार्मिक अल्पसंख्यक, राजनीतिक विपक्ष, महिलाएं और समलैंगिक समुदाय शामिल हैं।
घरेलू हिंसा जैसी गंभीर समस्याओं का सामना
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में महिलाओं को एसिड हमले, जबरन विवाह, बाल विवाह, दुष्कर्म, मानव तस्करी, जबरन धर्म परिवर्तन और घरेलू हिंसा जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
लड़कियों की शादी 18 वर्ष की आयु से पहले
साल 2025 में लाहौर हाई कोर्ट द्वारा यौवन प्राप्ति के बाद विवाह को इस्लामी कानून के तहत वैध मानने के फैसले का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि देश में बाल विवाह अब भी व्यापक रूप से जारी है और लाखों लड़कियों की शादी 18 वर्ष की आयु से पहले कर दी जाती है।