पाकिस्तान की धरती से भारत के पक्ष में एक बड़ी और अप्रत्याशित राजनीतिक आवाज़ सामने आई है। बलूचिस्तान के प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने न केवल बलूचिस्तान की आज़ादी की मांग को दोहराया है, बल्कि भारत के साथ खुलकर खड़े होने का ऐलान भी किया है। उन्होंने 2026 के पहले सप्ताह को “बलूचिस्तान ग्लोबल डिप्लोमैटिक वीक” के रूप में मनाने की घोषणा करते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर सीधा संवाद शुरू करने का संकेत दिया है।
बलूचिस्तान अब सीधे दुनिया से करेगा संवाद
मीर यार बलूच ने कहा है कि बलूचिस्तान के लोगों ने पाकिस्तान से अलग होने का अंतिम फैसला कर लिया है। इसी दिशा में 2026 के पहले सप्ताह को “2026 बलूचिस्तान ग्लोबल डिप्लोमैटिक वीक” के रूप में मनाया जाएगा। इस दौरान बलूचिस्तान खुद को एक स्वतंत्र गणराज्य के रूप में पेश करते हुए दुनिया के देशों से सीधे कूटनीतिक बातचीत करेगा। यह कदम पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चुनौती माना जा रहा है।
भारत को लिखा पत्र, मोदी सरकार की कार्रवाई की सराहना
बलूचिस्तान गणराज्य के प्रतिनिधि के रूप में मीर यार बलूच ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने भारत सरकार द्वारा आतंकवाद के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाइयों की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के ठिकानों पर की गई कार्रवाई ने न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूती दी, बल्कि न्याय और साहस का भी स्पष्ट संदेश दिया।
79 साल के दर्द का ज़िक्र, भारत को बताया भरोसेमंद साथी
मीर यार बलूच ने अपने पत्र में लिखा कि बलूचिस्तान के लोग पिछले करीब आठ दशकों से दमन, सैन्य अत्याचार और मानवाधिकार उल्लंघन झेल रहे हैं। अब बलूच जनता इस पीड़ा का स्थायी समाधान चाहती है। उन्होंने शांति, विकास, व्यापार, सुरक्षा और भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों जैसे विषयों पर भारत के साथ सहयोग को समय की आवश्यकता बताया और भारत को एक भरोसेमंद मित्र करार दिया।
चीन-पाक गठजोड़ पर चेतावनी
अपने बयान में मीर यार बलूच ने चीन और पाकिस्तान के बढ़ते रणनीतिक रिश्तों को गंभीर खतरा बताया। उन्होंने आशंका जताई कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले समय में चीनी सेना की बलूचिस्तान में मौजूदगी बढ़ सकती है, जो न केवल बलूच जनता बल्कि पूरे क्षेत्र, खासकर भारत की सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकती है।
कौन हैं मीर यार बलूच
मीर यार बलूच एक प्रसिद्ध बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता, लेखक और फ्री बलूचिस्तान आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक हैं। उन्होंने मई 2025 में बलूचिस्तान गणराज्य की स्वतंत्रता की घोषणा की थी। इसके साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से बलूचिस्तान की संप्रभुता को मान्यता देने और 2026 से दुनिया के कई देशों में राजनयिक मिशन खोलने की योजना भी सामने रखी है।