
Pakistan's big move: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में शुक्रवार को पाकिस्तान ने ऐसा कदम उठाया जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को शांति का दूत बताते हुए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित कर दिया। इस तरह पाकिस्तान, ट्रंप को नोबल के लिए नामित करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया। गौरतलब है कि हाल ही में शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी फील्ड मार्शल असीम मुनीर की वॉशिंगटन में ट्रंप से मुलाकात हुई थी, जिसके बाद से इस प्रस्ताव की चर्चा तेज हो गई थी।
ट्रंप की पाकिस्तान को खुश करने की रणनीति
पाकिस्तान के इस फैसले के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति की हालिया बयानबाजी भी अहम मानी जा रही है। ट्रंप ने शहबाज शरीफ और असीम मुनीर को “महान नेता” बताते हुए पाकिस्तान की जमकर तारीफ की थी। यहां तक कि उन्होंने पाकिस्तान को “महान देश” कहकर संबोधित किया। राजनीतिक हलकों का कहना है कि ट्रंप ने जानबूझकर पाकिस्तान को खुश करने की कोशिश की, ताकि उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर समर्थन मिल सके। नतीजतन, पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित कर दिया।
सीमा-पार आतंकवाद पर शहबाज की चुप्पी
हालांकि, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का यह रुख सवालों के घेरे में है। जब ANI ने शहबाज शरीफ से सीमा-पार आतंकवाद (क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म) पर सवाल पूछा, तो उन्होंने पहले इसे नज़रअंदाज़ कर दिया। बाद में दोबारा सवाल किए जाने पर उन्होंने केवल इतना कहा, “हम सीमा-पार आतंकवाद को हरा रहे हैं।” लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह दावा ज़मीनी हकीकत से काफी दूर है। ऐसे में पाकिस्तान द्वारा ट्रंप को नोबेल पुरस्कार के लिए नामित करना अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक रणनीतिक दांव के तौर पर देखा जा रहा है।